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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:49 · नई दिल्ली संस्करण

स्थायी समितियों के गठन के साथ विधायकों को मिले नए दायित्व, पश्चिम बंगाल विधानसभा का फैसला

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
स्थायी समितियों के गठन के साथ विधायकों को मिले नए दायित्व, पश्चिम बंगाल विधानसभा का फैसला

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा की वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न स्थायी (स्टैंडिंग) समितियों का गठन कर दिया गया है। विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के तहत वित्तीय, विधायी, प्रशासनिक और सदन के संचालन से संबंधित विभिन्न समितियों के अध्यक्षों एवं सदस्यों की नियुक्ति की गई है।

जारी सूची के अनुसार, सार्वजनिक लेखा समिति (पब्लिक अकाउंट्स कमेटी) का अध्यक्ष कन्हैयालाल अग्रवाल को बनाया गया है। पेपर्स लेड ऑन द टेबल समिति की जिम्मेदारी भांगड़ से आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी को सौंपी गई है। जबकि विशेषाधिकार समिति (कमेटी ऑफ प्रिविलेजेज) के अध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार होंगे।

अधीनस्थ विधान समिति (सबऑर्डिनेट लेजिस्लेशन कमेटी) की कमान रथीन घोष को दी गई है। वहीं सदस्यों के अधिकार एवं सुविधाएं समिति की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस करेंगे। इस समिति में उपाध्यक्ष, संसदीय कार्य मंत्री डॉ. शंकर घोष, मुख्य सरकारी सचेतक अमलान भादुड़ी सहित सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई विधायकों को सदस्य बनाया गया है।

विधानसभा पुस्तकालय समिति का नेतृत्व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं तृणमूल विधायक बिमान बनर्जी को सौंपा गया है। विधायक क्षेत्र उन्नयन प्रकल्प समिति की अध्यक्षता शीतल कापाट करेंगे। इसके अलावा समिति प्रणाली में सुधार एवं कार्यप्रणाली संबंधी समिति का अध्यक्ष समीर कुमार पांजा को बनाया गया है।

अधिसूचना के अनुसार हाउस कमेटी की अध्यक्षता भूदराय टुडू करेंगे। नियम समिति (रूल्स कमेटी) की कमान विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस के पास रहेगी। सरकारी आश्वासन समिति के अध्यक्ष रितेश तिवारी तथा याचिका समिति के अध्यक्ष चंद्रनाथ सिन्हा बनाए गए हैं।

इसके अलावा स्थानीय निधि लेखा समिति (लोकल फंड अकाउंट्स कमेटी) की अध्यक्षता अमरनाथ शाखा को तथा प्राक्कलन समिति (एस्टिमेट्स कमेटी) की अध्यक्षता लक्ष्मण चंद्र घोरुई को सौंपी गई है। विभिन्न समितियों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों को शामिल कर संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है।

विधानसभा की ये स्थायी समितियां सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, वित्तीय व्यय की समीक्षा, विधायी मामलों की जांच, प्रशासनिक कार्यों की निगरानी तथा सदन के सुचारु संचालन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श कर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें प्रस्तुत करेंगी। इन समितियों का कार्यकाल वर्ष 2026-27 तक प्रभावी रहेगा।

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