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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:43 · नई दिल्ली संस्करण

विदेश मंत्रालय: प्रशांत में भारत की भूमिका अहम

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
विदेश मंत्रालय: प्रशांत में भारत की भूमिका अहम

नई दिल्ली। भारत-न्यूजीलैंड के बीच रणनीतिक साझेदार और समुद्री सहयोग पर विदेश मंत्रालय (एमईए) के सचिव (ईस्ट) रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि भारत हिंद महासागर का देश है और अपने आसपास के समुद्री क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रखता है। उन्होंने कहा कि प्रशांत महासागर का क्षेत्र भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान टंडन ने कहा, "भारत हिंद महासागर का देश है। हम आसपास के समुद्री क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह सतर्क रहते हैं। प्रशांत महासागर हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है और हमने हमेशा न्यूजीलैंड को इस क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण तथा समान सोच वाली शक्ति के रूप में देखा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भारत-न्यूजीलैंड संबंधों में नई ऊर्जा भरने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। इसी का परिणाम है कि दोनों देशों के रिश्ते अब रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंच चुके हैं।

टंडन ने कहा, "हिंद महासागर और प्रशांत महासागर क्षेत्र के देशों के रूप में हमारे बीच घनिष्ठ रणनीतिक संबंध होना आवश्यक है। यही इस साझेदारी की मूल सोच और आधार है।"

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।

भारत एक बड़ा और तेजी से विकसित होता बाजार है, जहां अपार अवसर मौजूद हैं। वहीं, न्यूजीलैंड एक उन्नत अर्थव्यवस्था है, जिसके पास आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता है। उन्होंने कहा कि भारत ऐसी उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के साथ साझेदारी को मजबूत करना चाहता है और दोनों देशों के पास मजबूत आर्थिक संबंध विकसित करने की बेहतरीन संभावनाएं हैं।

टंडन ने यह भी कहा कि समुद्री पड़ोसी होने के नाते भारत और न्यूजीलैंड के लिए विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करना बेहद जरूरी है।

वीजा नियमों और उनमें लचीलेपन को लेकर पूछे गए सवाल पर रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि वीजा नीति किसी भी देश का संप्रभु निर्णय होती है।

उन्होंने कहा, "जब तक हमारे व्यवसाय सुचारु रूप से काम कर रहे हैं, हमारे छात्रों को पढ़ाई का अवसर मिल रहा है और दोनों देशों द्वारा तय किए गए आदान-प्रदान कार्यक्रम नियोजित रूप से जारी हैं, तब तक किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।

उन्होंने संकेत दिया कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है और दोनों देश रणनीतिक, आर्थिक, शैक्षणिक तथा जन-से-जन संपर्क के क्षेत्रों में संबंधों को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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