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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:16 · नई दिल्ली संस्करण

हल्द्वानी विवाद पर मंत्री खजान दास का बयान, भाजपा का कोई लेना-देना नहीं

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
हल्द्वानी विवाद पर मंत्री खजान दास का बयान, भाजपा का कोई लेना-देना नहीं

देहरादून। हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली के बाद कथित शुद्धिकरण को लेकर हुए विवाद पर उत्तराखंड के मंत्री खजान दास ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि इस कथित शुद्धिकरण से भाजपा का कोई संबंध नहीं है। साथ ही, उन्होंने धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

कांग्रेस के आरोपों को तर्कहीन और निराधार बताते हुए मंत्री खजान दास ने कहा कि भाजपा का शुद्धिकरण की किसी कार्रवाई से कोई लेना-देना नहीं है। रामलीला मैदान में पहले भी कई राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रम होते रहे हैं और अलग-अलग दलों के वरिष्ठ नेता वहां सभाएं कर चुके हैं।

उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता यशपाल आर्य का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भी इस मैदान में कई कार्यक्रम किए हैं, लेकिन उस समय शुद्धिकरण का कोई मामला सामने नहीं आया।

खजान दास ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के दौरान कथित तौर पर धर्म विशेष से जुड़े नारे लगाए गए, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी हुई। उत्तराखंड को देवभूमि माना जाता है और यहां धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

मंत्री ने दावा किया कि रामलीला मैदान में एक संस्था की ओर से शुद्धिकरण किया गया था, भाजपा का उसमें कोई कार्यकर्ता शामिल नहीं था। इस मामले की जांच में भी भाजपा कार्यकर्ता की संलिप्तता सामने नहीं आई।

कार्यक्रमों के दौरान कथित तौर पर समुदायों के बीच तनाव पैदा करने वाले बयानों पर भी मंत्री ने चिंता जताई। उन्होंने एक मौलवी द्वारा कथित चुनौती दिए जाने का जिक्र करते हुए इसे दुखद और चिंताजनक बताया।

खजान दास ने कहा कि उत्तराखंड शांतिप्रिय राज्य है और यहां सामाजिक सद्भाव बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। जो लोग लोगों के बीच वैमनस्य पैदा करने या धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास करते हैं, उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक टकराव का विषय बनाने के बजाय सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए।

उत्तराखंड में किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।

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