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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 6:35 · नई दिल्ली संस्करण

राजधानी की राजभवन और जज कालोनी के ठीक पास उग्रवादी संगठन टीपीसी ने चिपकाए पोस्टर, लगाया लाल बैनर

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन

रांची के रातू रोड चौक पर टीपीसी संगठन के नाम पर पोस्टरबाजी

रांची : राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को धत्ता बताते हुए उग्रवादी संगठन टीपीसी (तृतीय प्रस्तुति कमेटी) के नाम पर राजभवन और जज कालोनी के ठीक पास अतिव्यस्ततम व वीवीआईपी मार्ग से सटी दीवार पर धमकी भरे पोस्टर चिपकाए गए एवं लाल बैनर लगाने का दुस्साहस किया गया है। यहां पर पुलिस सुरक्षा के नाम पर हमेशा तैनात दिखती है, पर इसके बाद भी यह हिमाकत देखने को मिली। पोस्टरबाजी कर टीपीसी उग्रवादियों ने पुलिस व एनआईए के खिलाफ बयानबाजी की है।

राजधानी रांची के बीचो बीच, सरकारी और सुरक्षा तंत्र को तोड़ते हुए पोस्टर लगने की खबर मिलते ही पुलिस महकमा में खलबली मच गई। पोस्टरबाजी की सूचना मिलते ही सुखदेवनगर, कोतवाली और गोंदा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस आनन-फानन में पोस्टर और बैनर उखाड़ कर अपने साथ ले गयी. पुलिस मामले की छानबीन में जुटी हुई है. पुलिस रातू रोड चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगाल कर यह पता लगाने में जुटी हुई है कि पोस्टरबाजी करने के पीछे किसका हाथ है. उल्लेखनीय है कि कल ही टीपीसी के द्वारा चतरा, हजारीबाग, रामगढ़ और रांची में भी पोस्टरबाजी की गई थी. पोस्टरबाजी में एनआईए और पुलिस - प्रशासन के खिलाफ नारे लिखे थे. इस पोस्टरबाजी की घटना की पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. टीपीसी के द्वारा साटे गए पोस्टर में लिखा है कि सामंतवाद, सामान्यवाद, पूंजीवाद मुर्दाबाद मार्क्सवाद, लेनिनवाद, माओ विचार धारा जिंदाबाद', दमन, बलात्कारी हत्या के खिलाफ में व्यापक जनता गरज उठे, नक्सली जांच के नाम पर एनआईए के ओर से विस्थापित प्रभावित निर्दोष आम जनता को मारपीट फर्जी मुकदमा करना बंद करें.झारखंड में खदान चलता है पूंजीवादियों व माफियाओं का पेट भरता है। एनआईए और पुलिस- प्रशासन के दलाल दलाली करना बंद करें. सीसीएल एनटीपीसी के अधिकारी विस्थापित प्रभावित आम जनता को धौंस, धमकी, मारपीट, गाली- गलौज करना बंद करें. आम जनता की अपनी हक अधिकार जल, जंगल, जमीन से बेदखल करने वाली शिखंडी सरकार के खिलाफ मजदूर किसान एकजुट हो. भारत श्रेष्ठ भारत कहने वाले देखो भारतीय विस्थापन नीति से जनता है बेहाल. भारत सरकार विकास विकास चिल्लाता है, झारखंड में खदान चलता है और पूंजीवादियों माफियाओं का पेट भरता है. झारखंड राज्य अंतर्गत सीसीएल बीसीसीएल एनटीपीसी के ओर से अतिक्रमण और उत्खनन कर खेती योग्य जमीन को पहाड़ और बंजर बनाना बंद करें, जात न पात पर बात मानो बंद का अपने हक का.

ज्ञात हो कि टीपीसी उग्रवादी संगठन लगातार पोस्टरबाजी कर राज्यभर में दहशत फैला रहा है। एक दिन पहले भी पिपरवार, चान्हो, खलारी, बुढ़मू, बुंडू के अलावा रांची शहर के पंडरा इलाके में भी पोस्टरबाजी की गई थी। पोस्टरबाजी में पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारे लिखे थे। इस पोस्टरबाजी की घटना की पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

कई सवाल खड़े हो रहे

राजधानी के मध्य सरकारी तंत्र के बीच ऐसे पोस्टर लगना वाकई सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करता है। इस प्रकरण का सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह है कि सुबह में किसी तंत्र की नजर पोस्टर एवं बैनर पर नहीं गयी और न ही किसी तंत्र को सूचना मिली। आस-पास के कुछ लोगों की मानें तो मंगलवार को भी उन्होंने इस तरह पोस्टर और बैनर लगा हुआ देखा था पर गौर नहीं किया था। इनकी बातों को अगर नजरअंदाज भी कर दिया जो तब भी यह कमजोर सूचना तंत्र को दर्शाता है कि पुलिस को सूचना विलंब से मिली तब दोपहर में पहुंचकर पुलिस ने पोस्टर और बैनर हटाए। पूरी राजधानी को सीसीटीवी कैमरे की निगहबानी में रखने का दावा भी इस मामले में फेल साबित होता लग रहा है।

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