मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:35 · नई दिल्ली संस्करण

तृणमूल कांग्रेस विवाद पर ममता की मांग, 'चुनाव आयोग जल्द करे फैसला, प्रतिद्वंद्वी गुट को न मिले और समय'

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
तृणमूल कांग्रेस विवाद पर ममता की मांग, 'चुनाव आयोग जल्द करे फैसला, प्रतिद्वंद्वी गुट को न मिले और समय'

कोलकाता। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से तृणमूल कांग्रेस के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर चल रहे विवाद की सुनवाई जल्द पूरी करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि प्रतिद्वंद्वी गुट को अब और समय नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि उसे पहले ही कई अवसर दिए जा चुके हैं।

ममता बनर्जी ने बुधवार को चुनाव आयोग के सचिव अश्विनी कुमार मोहल को पत्र लिखकर कहा कि उनके नेतृत्व वाले गुट ने आयोग के निर्देश के अनुसार छह जुलाई को तय समय सीमा के भीतर अपना विस्तृत जवाब जमा कर दिया था। साथ ही जवाब की प्रति विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी को ई-मेल और स्पीड पोस्ट के माध्यम से भी भेजी गई थी।

उन्होंने बताया कि आयोग ने रितब्रत बनर्जी से भी छह जुलाई तक जवाब मांगा था। बाद में सात जुलाई को समय सीमा बढ़ाकर 10 जुलाई की गई और फिर रितब्रत बनर्जी के अनुरोध पर 25 जुलाई तक अतिरिक्त समय दिया गया। इसके बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उन्होंने कोई जवाब दाखिल किया है या नहीं।

ममता बनर्जी ने अपने पत्र में कहा कि यदि 25 जुलाई तक भी प्रतिद्वंद्वी गुट ने जवाब नहीं दिया है तो यह माना जाना चाहिए कि उनके छह जुलाई के सभी तर्कों और दावों का कोई उत्तर उनके पास नहीं है। उन्होंने कहा कि अब प्रतिद्वंद्वी गुट अपने 22 जून के मूल आवेदन से अलग कोई नया मामला नहीं बना सकता।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बार-बार समय बढ़ाने से प्रतिद्वंद्वी गुट को अपने पक्ष में नए और झूठे साक्ष्य तैयार करने का अवसर मिल सकता है। उन्होंने कहा कि आयोग की कार्यवाही निष्पक्ष और समान अवसर के सिद्धांत पर आधारित होनी चाहिए तथा किसी भी पक्ष को अनावश्यक लाभ नहीं मिलना चाहिए।

ममता बनर्जी ने आयोग से आग्रह किया कि पश्चिम बंगाल की राजनीति पर इस मामले का गहरा प्रभाव पड़ने वाला है। इसलिए बिना कोई और समय दिए जांच और सुनवाई जल्द पूरी कर निर्णय सुनाया जाए। उन्होंने पत्र में कहा कि न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बना रहना चाहिए और अनावश्यक देरी उस भरोसे को कमजोर करती है।

तृणमूल में विभाजन के बाद दोनों गुटों ने चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अपना-अपना दावा पेश किया है। आयोग का फैसला यह तय करेगा कि वास्तविक तृणमूल कांग्रेस के रूप में किस गुट को मान्यता मिलेगी और पार्टी के चुनाव चिह्न, संगठनात्मक ढांचे तथा वित्तीय संपत्तियों पर किसका अधिकार होगा।

यह विवाद विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद शुरू हुए सत्ता संघर्ष से जुड़ा है। पहली बार 1998 में पार्टी की स्थापना के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती देते हुए बागी गुट ने उन्हें अध्यक्ष पद से हटाकर वरिष्ठ विधायक अरूप राय को नया अध्यक्ष चुना और समानांतर संगठनात्मक ढांचा खड़ा किया। इसके साथ ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर भी दोनों गुटों के बीच विवाद चल रहा है, जिस पर न्यायालय में सुनवाई जारी है। समानांतर रूप से चुनाव आयोग भी दोनों पक्षों के दावों की जांच कर रहा है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें