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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:50 · नई दिल्ली संस्करण

पश्चिम बंगाल विधानसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में ममता गुट को नहीं मिली जगह

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
पश्चिम बंगाल विधानसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में ममता गुट को नहीं मिली जगह

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के प्रति वफादार माने जाने वाले गुट को एक और बड़ा झटका लगा है। नवगठित बिजनेस एडवाइजरी (बीए) कमेटी में इस गुट के किसी भी विधायक को स्थान नहीं दिया गया है।

बिजनेस एडवाइजरी कमेटी विधानसभा की सबसे महत्वपूर्ण वैधानिक समितियों में से एक मानी जाती है। यह समिति प्रत्येक सत्र से पहले बैठक कर सदन की कार्यवाही का खाका तय करती है। सत्र की अवधि, कार्यसूची, पेश किए जाने वाले विधेयकों और विभिन्न विषयों पर चर्चा के समय निर्धारण जैसे अहम फैसले इसी समिति में लिए जाते हैं।

सरल शब्दों में कहें तो विधानसभा की पूरी कार्यवाही के संचालन में इस समिति की केंद्रीय भूमिका होती है।

आईएएनएस के पास उपलब्ध नवगठित बीए कमेटी की सूची के अनुसार, समिति में कुल 19 स्थायी सदस्य हैं। इनमें 14 सदस्य सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से और पांच सदस्य विपक्षी तृणमूल कांग्रेस से हैं।

हालांकि, विपक्ष के हिस्से में आए सभी पांच स्थायी सदस्य तृणमूल कांग्रेस के उस ‘बागी लेकिन बहुमत’ वाले गुट से हैं, जिसका नेतृत्व निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं।

वर्तमान में वही विधानसभा में विपक्ष के नेता भी हैं। ऋतब्रत बनर्जी स्वयं भी बीए कमेटी के स्थायी सदस्य बनाए गए हैं।

स्थायी सदस्यों के अलावा समिति में 10 आमंत्रित सदस्य भी शामिल किए गए हैं। इनमें चार सदस्य भाजपा से और दो सदस्य तृणमूल कांग्रेस से हैं, जिनमें से एक ऋतब्रत बनर्जी गुट का प्रतिनिधि है।

वहीं, विधानसभा में कांग्रेस के दो विधायकों में से एक मोहताब शेख को भी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।

इसके अलावा, माकपा के एकमात्र विधायक, नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (एआईएसएफ) के एकमात्र प्रतिनिधि तथा आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के अकेले विधायक को भी समिति में आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में दोनों गुटों के विधायक अब भी तृणमूल कांग्रेस के सदस्य दर्ज हैं। ऐसे में तकनीकी रूप से बीए कमेटी के गठन और सदस्यों के चयन पर सवाल उठाना आसान नहीं होगा।

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