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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:04 · नई दिल्ली संस्करण

सीबीआई कोर्ट का बड़ा फैसला, लोन फ्रॉड में दो दोषियों को 3 साल कठोर कारावास

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
सीबीआई कोर्ट का बड़ा फैसला, लोन फ्रॉड में दो दोषियों को 3 साल कठोर कारावास

अहमदाबाद। अहमदाबाद की एक विशेष सीबीआई अदालत ने इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) के एक पूर्व ब्रांच मैनेजर और एक प्राइवेट व्यक्ति को बैंक धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराते हुए तीन साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। यह मामला ग्रीनहाउस प्रोजेक्ट के लिए धोखाधड़ी से लिए गए लोन से जुड़ा है, जिससे बैंक को 2.60 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।

सीबीआई ने कहा कि शुक्रवार को अदालत ने गुजरात के हिम्मतनगर में इंडियन ओवरसीज बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर नीरज कुमार जैन और प्राइवेट व्यक्ति केतन कुमार मोहनलाल पटेल को दोषी ठहराया। अदालत ने जैन पर 2.60 लाख रुपए और पटेल पर 1.10 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया।

सीबीआई के अनुसार, यह मामला 8 मई 2014 को नीरज कुमार जैन और 15 प्राइवेट व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज किया गया था। आरोप था कि अक्टूबर 2012 और सितंबर 2013 के बीच ब्रांच मैनेजर के तौर पर काम करते हुए नीरज कुमार जैन ने नीलेश कुमार दयाभाई पटेल, केतनकुमार मोहनलाल पटेल और 13 अन्य उधारकर्ताओं के साथ मिलकर इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ धोखाधड़ी करने की आपराधिक साजिश रची।

उन्होंने ग्रीन हाउस प्रोजेक्ट्स के लिए लोन लेने के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।

सीबीआई का आरोप है कि इस साजिश के कारण बैंक को 2.60 करोड़ रुपए का गलत नुकसान हुआ और आरोपियों को उतना ही गलत फायदा हुआ। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि जैन ने धोखाधड़ी वाले दस्तावेज होने के बावजूद लोन मंजूर करके और जारी करके अपने आधिकारिक पद का गलत इस्तेमाल किया।

जांच के दौरान एजेंसी को पता चला कि नीरज कुमार जैन ने ग्रीन हाउस प्रोजेक्ट्स के लिए 14 एग्रीकल्चरल टर्म लोन मंज़ूर किए और जारी किए थे।

आरोप है कि नीलेश कुमार दयाभाई पटेल और केतन कुमार मोहनलाल पटेल ने रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर आवेदन करके 12 लोन लिए। हर लोन 19 लाख रुपए का मंजूर किया गया था।

जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने 24 दिसंबर 2014 को जैन और तीन प्राइवेट व्यक्तियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल के बाद अदालत ने जैन और केतनकुमार मोहनलाल पटेल को दोषी ठहराया।

अविनाश यशवंतकुमार पटेल के खिलाफ आरोप साबित नहीं हो सके और उसे बरी कर दिया गया। निलेश दयाभाई पटेल के खिलाफ मुकदमे को अलग कर दिया गया है, क्योंकि वह फरार है।

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