वसुंधरा के गढ़ में लगा बीजेपी को बड़ा झटका, झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस ने हासिल किया प्रचंड बहुमत
राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के परिणामों ने राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल तेज कर दी, जब पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेत्री वसुंधरा राजे के सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले झालावाड़…

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के परिणामों ने राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल तेज कर दी, जब पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेत्री वसुंधरा राजे के सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले झालावाड़ जिले से अप्रत्याशित और चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। झालावाड़ नगर परिषद के चुनाव में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एकतरफा जीत दर्ज की है। इस राजनीतिक उलटफेर को भाजपा के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र को लंबे समय से वसुंधरा राजे का निर्विवाद राजनीतिक किला माना जाता रहा है।
झालावाड़ नगर परिषद के कुल 45 वार्डों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए 29 सीटों पर अपना परचम लहराया है। वहीं दूसरी ओर, इस गढ़ में लगातार अपना दबदबा बनाए रखने वाली भारतीय जनता पार्टी महज 13 वार्डों पर सिमट कर रह गई। इसके अलावा, दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीतने में सफल रहे और एक सीट आम आदमी पार्टी के खाते में गई। कांग्रेस के इस बेहतरीन प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय निकाय स्तर पर मतदाताओं का रुख किस तरह सत्ताधारी दल के खिलाफ बदला है।
इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि भाजपा अपने पिछले बोर्ड के सभापति का वार्ड भी बचाने में कामयाब नहीं हो पाई। वार्ड नंबर 39, जहां से पिछले बोर्ड में भाजपा के सभापति चुनकर आए थे, वहां भी कांग्रेस उम्मीदवार ने भारी अंतर से जीत हासिल की। राजकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय में जब वोटों की गिनती शुरू हुई, तो शुरुआती रुझानों के साथ ही कांग्रेस खेमे में उत्साह का माहौल बन गया था। जैसे-जैसे परिणाम घोषित होते गए, कांग्रेस की बढ़त मजबूत होती गई और पार्टी ने स्पष्ट बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वसुंधरा राजे के गृह जिले और उनके मुख्य प्रभाव क्षेत्र में इस तरह से भाजपा का सूपड़ा साफ होना और कांग्रेस का बढ़त बनाना आने वाले दिनों की राजनीतिक दिशा तय कर सकता है। हालांकि राज्य के दूसरे हिस्सों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, लेकिन झालावाड़ का यह परिणाम कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ी संजीवनी और रणनीतिक बढ़त की तरह है। इस जीत के बाद स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं में जश्न का माहौल है, और अब सभी की निगाहें आगामी बोर्ड गठन तथा सभापति पद के चुनाव पर टिकी हुई हैं।




