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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 10:42 · नई दिल्ली संस्करण

मध्य प्रदेश: ‘कृषि मंथन 2026’ में सीएम का संबोधन, किसान समृद्धि पर जोर

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
मध्य प्रदेश: ‘कृषि मंथन 2026’ में सीएम का संबोधन, किसान समृद्धि पर जोर

जबलपुर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (जेएनकेवीवी), जबलपुर में आयोजित 'कृषि मंथन 2026' कार्यक्रम को संबोधित किया। इस कार्यक्रम का आयोजन मध्य प्रदेश सरकार के किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग और विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।

इस सम्मेलन में राज्य के 'कृषि कल्याण वर्ष' 2026 के अंतर्गत अनुसंधान, विस्तार सेवाओं और बाजार पहुंच को समन्वित करने के लिए विचार-विमर्श किया गया।

उन्होंने 2026 को कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विविध कार्यक्रमों और एकीकृत गतिविधियों के लिए समर्पित वर्ष बताया।

हाल ही में शुरू हुई गेहूं की खरीद के संबंध में यादव ने भावांतर योजना के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सहायता और मसूर और चना जैसी फसलों के प्रसंस्करण के प्रयासों का उल्लेख किया, जिससे खेती अधिक लाभदायक बन सके।

उन्होंने 'जय किसान, जय जवान, जय विज्ञान' के नारे का जिक्र किया और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इसमें 'जय अनुसंधान' (जय शोध) को भी जोड़ दिया है।

मुख्यमंत्री ने किसान कल्याण को बढ़ावा देने के लिए 'विविधता में एकता' की अवधारणा के तहत विभिन्न विभागों को शामिल करते हुए समन्वित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि 'किसान कल्याण वर्ष' पहल के तहत, हमने पूरे वर्ष विविध प्रकार के विशिष्ट कार्यक्रमों का आयोजन करने का निर्णय लिया है।

परिणामस्वरूप विभिन्न विभागों को एक साथ लाकर, उनकी सामूहिक गतिविधियों के लिए एक एकीकृत मंच प्रदान करके, और इस विविधता के बीच ‘विविधता में एकता’ की भावना को कायम रखते हुए हम आज आपके समक्ष किसान कल्याण को समर्पित यह अनूठा कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे हैं।

उन्होंने प्राचीन भारतीय ज्ञान और भीमबेटका की शिलाचित्रों जैसे ऐतिहासिक प्रमाणों का हवाला देते हुए कृषि को प्रकृति के साथ सामंजस्य के गहरे दर्शन से जोड़ा।

यादव ने ग्राम-केंद्रित, प्रकृति-सम्मानित जीवनशैली की प्रशंसा की और 1960 के दशक में भारत के खाद्य संकट से उबरने की यात्रा को याद किया (जब भारत गेहूं आयात करता था) और फिर वैज्ञानिक अनुसंधान और लाल बहादुर शास्त्री जैसे नेताओं के नेतृत्व में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का वर्णन किया।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यादव ने नदी जोड़न परियोजना की दूरदृष्टि पर प्रकाश डाला और बताया कि कैसे 1970 के दशक में राजनीतिक बाधाओं के कारण नर्मदा घाटी में प्रगति में देरी हुई।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सरदार सरोवर बांध के निर्माण का श्रेय दिया, जिससे जल उपलब्धता में क्रांतिकारी परिवर्तन आया।

उन्होंने कहा कि मां नर्मदा हमारी जीवनरेखा हैं।

उनका जल मध्य प्रदेश को हरा-भरा रखता है, गुजरात में खुशियां और समृद्धि लाता है, और राजस्थान सहित अन्य राज्यों की प्यास बुझाता है।

मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश की उपलब्धियों का बखान करते हुए कहा कि राज्य दालों के उत्पादन में देश में अग्रणी है और तिलहन, खाद्यान्न और गेहूं में भी उच्च स्थान रखता है।

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