लोस चुनाव: यूपी में दो लाख से ज्यादा मतों से जीते थे भाजपा के 24 सांसद
लखनऊ। 2019 के लोकसभा चुनाव में उप्र में कुल 25 उम्मीदवार
ऐसे थे, जो दो लाख से अधिक मतों से जीते थे। उसमें सिर्फ आजमगढ़ से सपा
उम्मीदवार अखिलेश यादव की जीत को छोड़कर सभी भाजपा के उम्मीदवार थे। यह
स्थिति तब थी, जब सपा, बसपा और रालोद का गठबंधन था। इस वर्ष रालोद भाजपा के
साथ है और पश्चिम में उसका असर देखने को मिलेगा ।
पिछले
चुनाव को देखा जाय तो पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा मतों से जीतने का
रिकार्ड वीके सिंह का है, जो 5,01,500 मतों से विजयी हुए थे। इस वर्ष वे
चुनाव मैदान में नहीं हैं और उनकी जगह भाजपा ने अपने विधायक अतुल गर्ग को
टिकट दिया है। वहीं इसके बाद चार लाख से ज्यादा मतों से जीतने वाले
उम्मीदवारों में फतेहपुरसीकरी से राजकुमार चाहर (4,95,065 भाजपा), वाराणसी
से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (4,79,505 भाजपा), उन्नाव से साक्षी महाराज
(4,00,956 भाजपा) थे।
चार लाख से कम और तीन लाख से ज्यादा
मतों से जीतने वाले प्रदेश में छह उम्मीदवार रहे। इसमें झांसी से भाजपा के
अनुराग शर्मा 3,65,683, लखनऊ से राजनाथ सिंह 3,47,302, महाराजगंज से पंकज
चौधरी 3,40,424, कुशीनगर से विजय दूबे 3,37,560, गौतमबुद्धनगर से महेश
शर्मा 336,922 और गोरखपुर से रविकिशन 3,01,664 मतों से विजयी हुए थे।
दो
लाख से ज्यादा और तीन लाख से कम मतों से जीतने वाले उम्मीदवारों में 15
उम्मीदवार थे। इसमें भी सिर्फ अखिलेश यादव को छोड़कर सभी भाजपा और उसके
सहयोगी दल अपना दल एस के थे। अखिलेश यादव आजमगढ़ से 2,59,874 मतों से भाजपा
के निरहुआ को हराया था। उसे भी उपचुनाव में निरहुआ ने सपा उम्मीदवार को
हराकर सीट पर कब्जा जमा लिया।
वहीं मिर्जापुर से अनुपिया पटेल,
देवरिया से रमापति राम त्रिपाठी, केसरगंज से बृजभूषण शरण सिंह, हमीरपुर से
पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल, अकबरपुर से देवेन्द्र सिंह, फर्रुखाबाद से मुकेश
राजपुत, खिरी से अजय मिश्र, शाहजहांपुर से अरूण कुमार सागर, पीलीभीत से
वरूण गांधी, आगरा से सत्यपाल सिंह, मथुरा से हेमा मालिनी, हाथरस से राजवीर
सिंह, अलीगढ़ से सतीश कुमार गौतम, बुलंदशहर से भोला सिंह ऐसे भाजपा
उम्मीदवार थे, जो दो लाख से ज्यादा मतों से विजयी हुए थे।





