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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:56 · नई दिल्ली संस्करण

भगवान बुद्ध के विचार आज भी प्रासंगिक, दुनिया मान रही महत्व: केशव मौर्य

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
भगवान बुद्ध के विचार आज भी प्रासंगिक, दुनिया मान रही महत्व: केशव मौर्य

—धम्मचक्क पवत्तन दिवस पर सारनाथ से दिया गया विश्व शांति, सद्भाव और मानव कल्याण का संदेश

वाराणसी। आषाढ़ पूर्णिमा एवं धम्मचक्क पवत्तन दिवस के अवसर पर बुधवार को ऐतिहासिक सारनाथ भगवान बुद्ध के उपदेशों और विश्व शांति के संदेश से गुंजायमान रहा। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी), नई दिल्ली तथा केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान, सारनाथ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

समारोह में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भगवान बुद्ध का मध्यम मार्ग विश्व में शांति, सद्भाव और मानव कल्याण का मार्ग है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भगवान बुद्ध के विचारों की प्रासंगिकता को स्वीकार कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकार भगवान बुद्ध से जुड़े तीर्थ एवं विरासत स्थलों के समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के विचारों के प्रति दुनिया का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है और सरकार बौद्ध स्थलों के विकास तथा धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम का शुभारंभ अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महासचिव शार्त्से खेंसुर जंगचुप चोएडेन रिनपोछे के स्वागत भाषण से हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान के विद्यार्थियों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित अतिथियों का मन मोह लिया।

उल्लेखनीय है कि बौद्ध परंपरा में आषाढ़ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, इसी दिन ज्ञान प्राप्ति के सात सप्ताह बाद भगवान बुद्ध ने सारनाथ में अपना प्रथम उपदेश दिया था। पाली भाषा में इसे धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त तथा संस्कृत में धर्मचक्र प्रवर्तन सूत्र कहा जाता है। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष धम्मचक्क पवत्तन दिवस मनाया जाता है।

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