लोस चुनाव : उप्र में हाशिये पर पहुंचे वामदल, तीन दशक पहले हासिल की थी आखिरी जीत
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक समय वो भी था जब कई
संसदीय सीटों पर वामदलों का प्रभाव था। इनमें औद्योगिक नगरी कानपुर,धार्मिक
नगरी अयोध्या और वाराणसी समेत बुंदेलखंड और पश्चिम उत्तर प्रदेश की सीटें
शामिल थी। 1991 के आम चुनाव के बाद से वामदलों का कोई यूपी में सांसद नहीं
बन सका।
उल्लेखनीय है कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा)
की स्थापना 26 दिसम्बर 1925 को कानपुर में हुई थी। एमएन राय नामक नेता ने
इसकी स्थापना की थी। हालांकि वामपंथी आन्दोलनों में भाकपा की स्थापना की
तिथि को लेकर विवाद है। वामदल उप्र में इस कदर कमजोर है कि सभी सीटों पर
चुनाव तक नहीं लड़ पाते हैं।
पहले आम चुनाव में प्रदर्शन
1952
में देश में हुए पहले आम चुनाव उप्र में भाकपा के दो प्रत्याशी झांसी और
आजमगढ़ सीट से मैदान में उतरे। एक प्रत्याशी की जमानत जब्त हुई। भाकपा
प्रत्याशियों को 59699 (0.35 फीसदी) वोट हासिल हुए।
दूसरे आम चुनाव में खाता खुला
1957
के दूसरे आम चुनाव में उप्र में पहली बार वामदलों ने जीत का स्वाद चखा।
रसड़ा से भाकपा प्रत्याशी सरजू पांडे जीते। सरजू पांडे ने कांग्रेस के डॉ.
शौकतुल्लाह शाह अंसारी को हराया था। इस चुनाव में भाकपा ने मेरठ, झांसी,
रसड़ा, बलिया, घोसी, सलेमपुर, फैजाबाद और लखनऊ से प्रत्याशी मैदान में
उतारे थे। भाकपा के खाते में कुल 383509 (1.67 फीसदी) वोट आए।
तीसरे आम चुनाव में दो सीटें जीती
1962 के आम चुनाव में भाकपा ने 18 प्रत्याशी मैदान में उतारे। घोसी और रसड़ा पर उसे जीत मिली। भाकपा को 3.63 फीसदी वोट हासिल हुए।
1967 के चुनाव में 6 सीटें जीती
चौथे
आम चुनाव में भाकपा के 17 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। वहीं साठ के दशक
में पैदा हुई कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सवादी (माकपा) ने भी 6
प्रत्याशी मैदान में उतारे। 5 सीटों पर भाकपा और एक सीट पर माकपा ने जीत
दर्ज की। यह भाकपा का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। इस चुनाव में भाकपा को 3.62
फीसदी वोट मिले। भाकपा ने अमरोहा, घोसी, गाजीपुर, बांदा और मुजफ्फरनगर
सीटे जीती थी। वहीं माकपा ने वारणसी सीट पर कब्जा किया था। माकपा के खाते
में 1.19 फीसदी वोट आए।
1971 में घट गई सीटें
1971
के चुनाव में अमरोहा, घोसी, गाजीपुर और मुजफ्फनगर चार सीटों पर भाकपा के
उम्मीदवार जीते और उसे 3.70 फीसदी वोट मिले। लेकिन यह पार्टी का अन्तिम
श्रेष्ठ प्रदर्शन था। उस चुनाव में भाकपा ने 9 और माकपा ने 3 प्रत्याशी
उतारे थे। भाकपा का इस चुनाव में खाता नहीं खुला। उसे 0.19 फीसदी वोट मिलें
1977 में खाता नहीं खुला
1977 के आम चुनाव
में में भाकपा ने 13 और माकपा के 2 प्रत्याशी मैदान थे। 15 में से 14
उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई। इस चुनाव में वाम दलों का खाता नहीं खुला।
भाकपा का वोट प्रतिशत 1.10 और माकपा का 0.10 फीसदी रहा।
1980
में भाकपा प्रत्याशी झारखंडे राय ने घोसी सीट जीती। इस चुनाव में भाकपा ने
5 और माकपा ने एक प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। भाकपा का वोट 1.63 फीसदी
रहा। 1984 के आम चुनाव में भाकपा ने 14 और फारवर्ड ब्लाक ने एक प्रत्याशी
चुनाव में उतारा। 12 की जमानत जब्त हुई। भाकपा को 1.69 फीसदी वोट मिले।
1989 में थोड़ी हालत सुधरी
1989
के आम चुनाव में वामदलों ने तीन सीटें जीती। भाकपा ने 9, माकपा ने 1 और
फारवर्ड ब्लाक ने तीन प्रत्याशी उतारे थे। भाकपा ने फैजाबाद और बांदा दो
सीटों पर कब्जा किया। वहीं माकपा कानुपर सीट जीतने में सफल रही। भाकपा को
1.36 और माकपा को 0.45 फीसदी वोट मिले।





