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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:37 · नई दिल्ली संस्करण

ग्राम सचिवालय में 1 जुलाई से बैठेंगे लेखपाल, अब ग्रामीणों को नहीं लगाने पड़ेंगे तहसील के चक्कर

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
ग्राम सचिवालय में 1 जुलाई से बैठेंगे लेखपाल, अब ग्रामीणों को नहीं लगाने पड़ेंगे तहसील के चक्कर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में आम नागरिकों को राजस्व संबंधी सेवाएं अधिक सुगम और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप अब प्रत्येक जनपद में लेखपालों की ग्राम सचिवालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। इसको लेकर राजस्व परिषद की ओर से सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी किया गया है। पत्र में रोस्टर तैयार कर 1 जुलाई से नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लगातार प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवाओं को गांव स्तर तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में प्रत्येक जनपद में लेखपालों की ग्राम सचिवालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों में पहले से स्थापित ग्राम सचिवालयों का उद्देश्य विभिन्न विभागों की सेवाओं को ग्रामीणों तक एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है।

पंचायतीराज विभाग के पूर्व आदेशों के अनुरूप ग्राम सचिवालयों में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था की गई है। अब इसी व्यवस्था को और प्रभावी बनाते हुए लेखपालों की नियमित उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि राजस्व विभाग से संबंधित कार्यों का त्वरित निस्तारण हो सके। बता दें कि ग्राम सचिवालयों के माध्यम से पंचायत सहायकों द्वारा संचालित ऑनलाइन सेवाओं में राजस्व विभाग की कई महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं।

इनमें आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, हैसियत प्रमाणपत्र, खतौनी की नकल सहित लगभग दस प्रमुख सेवाएं शामिल हैं।

इन सेवाओं के समयबद्ध निस्तारण में लेखपाल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में ग्राम सचिवालय में उनकी नियमित उपलब्धता से ग्रामीणों को तहसील के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता काफी हद तक कम होगी। राजस्व परिषद ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि लेखपाल केवल प्रमाण पत्रों से जुड़े कार्य ही नहीं करते, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की मजबूत कड़ी के रूप में भी कार्य करते हैं।

तहसील दिवस, थाना दिवस, वरासत, स्वामित्व योजना, किसान सम्मान निधि, राहत एवं पुनर्वास, आपदा प्रबंधन, भूमि विवादों का निस्तारण, कृषि गणना, जनगणना, फसल गिरदावरी, प्राकृतिक आपदाओं की रिपोर्ट, अवैध कब्जों की जांच, खनन संबंधी सत्यापन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े सत्यापन तथा धान-गेहूं क्रय केंद्रों के सत्यापन जैसे अनेक महत्वपूर्ण दायित्व भी लेखपाल निभाते हैं। इसके अलावा विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन में भी लेखपालों की रिपोर्ट और सत्यापन की आवश्यकता पड़ती है।

वहीं ग्राम पंचायत स्तर पर लेखपालों के बैठने के लिए कोई निश्चित व्यवस्था नहीं होने के कारण आम जनता को असुविधा का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों को कई बार लेखपाल से मिलने के लिए तहसील या अन्य स्थानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है। इस समस्या को समाप्त करने के उद्देश्य से अब प्रत्येक जनपद में रोस्टर बनाकर लेखपालों की ग्राम सचिवालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है।

राजस्व परिषद ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वे अपने-अपने जनपदों में लेखपालों के बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें और उनकी उपस्थिति का रोस्टर निर्धारित करें। यह व्यवस्था 1 जुलाई से प्रभावी रूप से लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था से ग्राम सचिवालय ग्रामीणों के लिए 'वन स्टॉप सर्विस सेंटर' के रूप में विकसित होंगे। इससे न केवल आमजन को राहत मिलेगी, बल्कि राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली भी अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।

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