मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 5:56 · नई दिल्ली संस्करण

लखीमपुर खीरी मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट , शीर्ष अदालत की निगरानी में सीबीआइ जांच कराने की मांग

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

लखीमपुर खीरी मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। दो वकीलों ने मामले को लेकर कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में घटना की न्यायिक जांच सीबीआइ से कराने की अपील की गई है।

नई दिल्ली : लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की शीर्ष अदालत की निगरानी में सीबीआइ जांच कराने के लिए दो वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा है। पत्र में कथित रूप से घटना में शामिल मंत्रियों को दंडित करने की भी मांग की गई है। वकील शिव कुमार त्रिपाठी और सीएस पांडा के पत्र में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसानों की हत्या की गंभीरता को देखते हुए, यह आवश्यक है।

इस अदालत को इस इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। वकीलों ने दावा किया कि हाल के दौर में हिंसा देश में राजनीतिक संस्कृति बन गई है। लखीमपुर खीरी में किसानों के विरोध के दौरान हुई हिंसा में रविवार को चार किसानों सहित आठ लोग मारे गए। वकीलों ने कहा कि उप्र के इस हिंसाग्रस्त जिले में कानून के शासन की रक्षा करने की आवश्यकता है।

पत्र में कहा गया है कि यह घटना उप्र सरकार और संबंधित नौकरशाहों के साथ-साथ गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कानून तोड़ने वाली पुलिस मशीनरी के खिलाफ निर्देश देने की मांग करती है ताकि हिंसा के चलन को रोका जा सके।वकीलों ने कहा कि उनके आवेदन को जनहित याचिका के रूप में माना जा सकता है, ताकि दोषियों को न्याय के दायरे में लाया जा सके। पत्र में इस घटना में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने के साथ ही शीर्ष अदालत की निगरानी में उच्च स्तरीय न्यायिक जांच समिति गठित करने की भी मांग की गई है।

रविवार को हुई इस घटना में आठ लोगों की मौत हो गई। वहीं कई अन्य घायल हो गए। किसानों की हत्या के आरोप में गृह राज्य मंत्री के बेटे आशीष मिश्र 'मोनू' समेत 14 के खिलाफ किसानों की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है। वहीं, मारे गए सभी आठ लोगों के स्वजन को राज्य सरकार की ओर से 45-45 लाख रुपये व एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की गई है। वहीं सभी घायलों को दस-दस लाख रुपये दिए जाएंगे।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें