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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:39 · नई दिल्ली संस्करण

केरल हाईकोर्ट का चुनाव आयोग को निर्देश, बी. गोपालकृष्णन के खिलाफ शिकायत दो महीने में निपटाई जाए

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
केरल हाईकोर्ट का चुनाव आयोग को निर्देश, बी. गोपालकृष्णन के खिलाफ शिकायत दो महीने में निपटाई जाए

कोच्चि। केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को भारत निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह दो महीने के भीतर उस शिकायत पर विचार करे, जिसमें आरोप लगाया गया है कि भाजपा नेता बी. गोपालकृष्णन ने गुरुवायूर में चल रहे विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सांप्रदायिक टिप्पणी की थी।

जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने केरल स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) के नेता गोकुल द्वारा दायर एक रिट याचिका का निपटारा करते हुए यह निर्देश जारी किया।

याचिकाकर्ता ने एनडीए उम्मीदवार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी और उन पर सोशल मीडिया पर कथित सांप्रदायिक पोस्ट के जरिए चुनाव कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था।

गुरुवायूर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे गोपालकृष्णन ने ऐसी सामग्री पोस्ट की थी, जिसमें दावा किया गया था कि विरोधी दल इस क्षेत्र में हिंदू उम्मीदवार उतारने में नाकाम रहे हैं।

इन टिप्पणियों के कारण कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई और गुरुवायूर मंदिर पुलिस स्टेशन ने भारतीय न्याय संहिता के साथ-साथ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक मामला दर्ज कर लिया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि इस घटना के संबंध में पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और विवादित वीडियो को हटा दिया गया है।

कोर्ट ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ता पहले ही एक औपचारिक शिकायत के साथ भारत निर्वाचन आयोग से संपर्क कर चुका है, जो अभी लंबित है। अपने आदेश मेंकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि चूंकि निर्वाचन आयोग के समक्ष उपलब्ध वैधानिक उपाय का अभी तक पूरी तरह से उपयोग नहीं किया गया है, इसलिए ईसीआई के लिए इस मामले पर सोच-समझकर कोई फैसला लेना ही उचित होगा।

पीठ ने चल रही चुनाव प्रक्रिया का हवाला देते हुए आरोपों की मेरिट (गुण-दोष) पर कोई भी ठोस टिप्पणी करने से परहेज किया।

कोर्ट ने कहा, "चूंकि चुनाव पहले ही शुरू हो चुके हैं, इसलिए कोर्ट के लिए ऐसी कोई भी टिप्पणी करना उचित नहीं है जिसका प्रस्तावित चुनाव पर कोई असर पड़े।

साथ ही ईसीआई को निर्देश दिया कि वह आदेश मिलने के दो महीने के भीतर इस शिकायत पर फैसला ले।

इस निर्देश के साथ ही याचिका का निपटारा कर दिया गया और अब इस राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में आगे की कार्रवाई तय करने का काम निर्वाचन आयोग पर छोड़ दिया गया है।

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