व्रत अधूरा न रह जाए, सोलह श्रृंगार से लेकर करवा तक करवा चौथ की पूरी सामग्री लिस्ट यहाँ देखें
करवा चौथ पर 3 पूजाएं होती हैं। सुबह सरगी: फेनी, सेवइयां, मिठाई, मठरी, पूरी, फल, ड्राई फ्रूट्स, दूध-चाय। दोपहर कथा पूजा: 2 मिट्टी के टोंटीदार करवे, ढक्कन, शिव-पार्वती-गणेश मूर्ति, रोली, चावल, हल्दी, फूल, माला, दीपक, धूप, सोलह श्रृंगार - सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, चूड़ा, बिछिया, चुनरी, 8 पूए-पूरियां, हलवा, बायना के लिए साड़ी-मिठाई। रात चांद पूजा: छलनी, जल भरा करवा, दीपक, मिठाई।

करवा चौथ आ रहा है और हर सुहागिन महिला की सबसे बड़ी टेंशन होती है - पूजा की तैयारी पूरी है या नहीं? दुकान पर जाकर कुछ न कुछ छूट ही जाता है। इसलिए इस बार हमने सुबह की सरगी से लेकर रात के चांद तक की पूरी लिस्ट एक जगह बना दी है। आप इस लिस्ट का स्क्रीनशॉट लेकर रख लीजिए, कुछ भी मिस नहीं होगा। सुबह 4 बजे - सरगी की थाली (व्रत की शुरुआत): करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से पहले सरगी खाने से शुरू होता है। सरगी सास अपनी बहू को देती है, इसका मतलब है सास अपने आशीर्वाद से बहू को व्रत के लिए ताकत दे रही है।
सरगी में ऐसी चीजें होनी चाहिए जिससे दिन भर भूख-प्यास कम लगे और एनर्जी बनी रहे। फेनी - ये सबसे जरूरी है, इसके बिना सरगी अधूरी है। साथ में मीठी सेवइयां, 2-3 तरह की मिठाई, मठरी, नमक पारे, पूरी और आलू की सब्जी। सेब, केला, अनार, बादाम, काजू, किशमिश। ये दिन भर एनर्जी देंगे। पीने के लिए दूध, चाय। कई जगह सास सरगी के साथ नई चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी भी देती है। याद रखें: सरगी सूरज निकलने से पहले खानी है। 5:30 बजे के बाद कुछ भी खाना-पीना बंद।
दोपहर में - करवा माता और शिव-पार्वती की पूजा: यह दिन की सबसे मुख्य पूजा है। मोहल्ले या सोसाइटी की महिलाएं एक जगह इकट्ठी होकर करवा माता की कथा सुनती हैं। इसी पूजा के लिए सबसे ज्यादा सामान लगता है। टोंटी वाला मिट्टी का करवा - 2 नग। एक कथा के लिए, दूसरा रात में चांद को जल देने के लिए। साथ में 2 ढक्कन और 2 दीये। शिव जी, पार्वती जी, गणेश जी और कार्तिकेय जी की छोटी मिट्टी की मूर्तियां। रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, चंदन, अक्षत (साबुत चावल), गेहूं के दाने, फूल, फूलों की माला, दूब घास, धूप, अगरबत्ती, कपूर, घी का दीया, माचिस, इत्र।
सुहाग पिटारी ये सामान करवा माता को चढ़ाया जाता है। सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, महावर (अलता), कंघा, शीशा, चूड़ियां, बिछिया, पायल, नथ, लाली, चुनरी, काजल, नेल पेंट, सुगंध। आटे से बने 8 पुए, 8 पूरियां, मीठा हलवा, खीर, चीनी से बना करवा, गुड़, एक लोटा जल। और बायना निकालने के लिए - एक थाली में 5-7 सुहागिनों को देने के लिए छोटी-छोटी साड़ी, ब्लाउज, मिठाई, फल और 11, 21, 51 रुपये शगुन के।
रात में - चांद और पति की पूजा: पूरा दिन इंतजार इसी पल का होता है। चांद दिखते ही व्रत पूरा होता है। चांद को अर्घ्य देने के लिए छलनी - इसी में से चांद और फिर पति का चेहरा देखा जाता है। जल से भरा मिट्टी का करवा, दीपक, रोली, चावल, फूल, मिठाई और पानी का गिलास। दीपक, फूल माला, मिठाई, और पति के पैर छूने के बाद आशीर्वाद। पहले मीठा पानी, फिर मिठाई। कई लोग मीठा पानी पति के हाथ से पीते हैं।
आखिर में 3 जरूरी टिप्स जो हर कोई भूल जाता है: करवा मिट्टी का ही लें। आजकल पीतल और स्टील के भी आते हैं पर पूजा में मिट्टी का करवा ही शुभ माना जाता है। करवे पर रोली से स्वास्तिक बनाना और मौली कलावा बांधना मत भूलना। सारा सामान एक दिन पहले शाम तक ले आएं। व्रत वाले दिन बाजार में बहुत भीड़ होती है और आप थक जाएंगी। बस इतनी तैयारी कर ली तो आपका करवा चौथ का व्रत बिना किसी टेंशन के बहुत अच्छे से पूरा हो जाएगा।
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