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मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 · दोपहर 1:40 · नई दिल्ली संस्करण

पति की लंबी उम्र चाहिए तो न करें ये भूल, वरना अधूरा रह जाएगा व्रत

करवा चौथ 28 अक्टूबर को है। इस दिन की छोटी गलती भी व्रत खंडित कर सकती है। काले-सफेद कपड़े न पहनें, लाल-गुलाबी शुभ हैं। दिन में सोना और सुई-धागा, कैंची का इस्तेमाल न करें। किसी का अपमान, झगड़ा या कड़वे वचन न बोलें। अपना सिंदूर, बिंदी, चूड़ी किसी को दान न करें। बिना चांद देखे व्रत न तोड़ें, छलनी से चांद और पति को देखकर ही व्रत खोलें।

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पति की लंबी उम्र चाहिए तो न करें ये भूल, वरना अधूरा रह जाएगा व्रत

Karwa Chauth 2026 इस बार 28 अक्टूबर 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाने वाला ये व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि यदि व्रत में कुछ गलतियां हो जाएं तो व्रत खंडित हो जाता है और पूरा फल नहीं मिलता। इसलिए इन 5 गलतियों को भूलकर भी न करें। करवा चौथ सुहाग का पर्व है। इस दिन काले, सफेद या भूरे रंग के कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है। ये रंग नकारात्मकता और वैराग्य के प्रतीक हैं। इस दिन लाल, गुलाबी, पीला, हरा या मरून जैसे शुभ और चटख रंग पहनें। लाल रंग को तो सबसे ज्यादा शुभ माना गया है, क्योंकि ये सुहाग और शक्ति का प्रतीक है।


शास्त्रों के अनुसार करवा चौथ के दिन दिन में सोने से व्रत का फल नहीं मिलता। दिन में सोना अशुभ माना जाता है। इसी तरह कैंची, सुई, धागे का इस्तेमाल करना भी वर्जित है। कहा जाता है कि सिलाई-कढ़ाई या स्वेटर बुनने से किस्मत में गांठ पड़ती है और वैवाहिक जीवन में परेशानियां आती हैं। इस दिन व्रत रखने वाली महिला को अपने मन, वचन और कर्म को पवित्र रखना चाहिए। किसी बड़े-बुजुर्ग, सास या पति का अपमान भूलकर भी न करें। किसी के बारे में बुरा बोलना, चुगली करना या झगड़ा करने से व्रत खंडित हो जाता है। इस दिन प्रेम, माफी और सम्मान की भावना रखनी चाहिए। सुहाग की निशानी यानी सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, बिछिया का दान नहीं करना चाहिए। करवा चौथ के दिन अपना बिंदी, सिंदूर या चूड़ियां किसी दूसरी महिला को देने से अपना सुहाग दूसरों को देने के समान माना जाता है। पूजा के बाद ही ये सामान किसी को दें, वो भी सोच-समझकर।


सबसे बड़ी गलती जो कई बार महिलाएं कर देती हैं, वो है बिना चंद्रमा दर्शन के व्रत तोड़ देना। करवा चौथ का व्रत तभी पूरा माना जाता है जब आप छलनी से चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखकर अर्घ्य देती हैं। यदि बादल के कारण चांद न दिखे तो भगवान शिव-पार्वती की पूजा कर व्रत खोल सकते हैं, लेकिन जानबूझकर चांद से पहले खाना-पीना व्रत को खंडित कर देता है। ध्यान दें: इस दिन सरगी का विशेष महत्व है। सास द्वारा दी गई सरगी को सूर्योदय से पहले खाना चाहिए और दिन भर निर्जला रहना चाहिए। व्रत के दौरान मन में केवल पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना रखें।

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