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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:45 · नई दिल्ली संस्करण

कानपुर शहर के 14 नाले टैप होंगे, गंगा होगी साफ, 138 करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
कानपुर शहर के 14 नाले टैप होंगे, गंगा होगी साफ, 138 करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी

कानपुर। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर के विकास और गंगा नदी को स्वच्छ बनाने की दिशा में मंगलवार को अहम कदम उठाया गया है। शहर के 14 प्रमुख नालों को टैप करने की 138 करोड़ 11 लाख रुपये की परियोजना को स्वीकृति मिल गई है। स्थानीय सांसद रमेश अवस्थी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह परियोजना नमामि गंगे अभियान को मजबूत करने के साथ ही शहर में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।सांसद अवस्थी ने बताया कि इस योजना के तहत शहर के प्रमुख नालों के गंदे पानी को सीधे गंगा नदी में गिरने से रोका जाएगा। इसके लिए नालों को टैप कर उनके पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की ओर मोड़ा जाएगा, जिससे गंगा में जाने वाले प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। लंबे समय से कानपुर में नालों से निकलने वाला अपशिष्ट जल गंगा प्रदूषण का प्रमुख कारण माना जाता रहा है।सांसद रमेश अवस्थी ने यह भी बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय जलमार्ग-एक को वाराणसी से कानपुर तक विस्तारित करने की मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से की है। वर्तमान में यह जलमार्ग वाराणसी से कोलकाता तक संचालित है। इसे कानपुर तक करीब दो सौ किलोमीटर बढ़ाए जाने से क्षेत्र के उद्योगों को माल ढुलाई के लिए सस्ता और सुविधाजनक विकल्प मिल सकेगा।इस विस्तार से कानपुर के चमड़ा उद्योग, जिसका वार्षिक निर्यात लगभग छह हजार करोड़ रुपये है, को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। इसके अलावा लगभग दो सौ करोड़ रुपये के वस्त्र उद्योग तथा 16 हजार 675 से अधिक इंजीनियरिंग इकाइयों को भी परिवहन लागत में राहत मिलेगी। कन्नौज के इत्र और सुगंधित उत्पादों के निर्यात को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।अनुमान है कि जलमार्ग के विस्तार से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में लगभग 04 हजार करोड़ रुपये की वृद्धि हो सकती है और हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा; साथ ही घाटमपुर और पनकी तापीय संयंत्रों को लगभग चार मिलियन टन कोयला जलमार्ग से उपलब्ध हो सकेगा, जिससे परिवहन लागत में लगभग चालीस प्रतिशत तक कमी आ सकती है।सांसद के अनुसार इन दोनों पहलों से एक ओर जहां कानपुर के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण और गंगा की स्वच्छता को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से शहर के विकास को नई दिशा मिलेगी।

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