'अपराधियों में डर पैदा करना जरूरी', दिल्ली रेप मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को दिए निर्देश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में रेप की हालिया घटनाओं पर सख्ती दिखाते हुए दिल्ली पुलिस को अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि आपको अपराध करने की सोच रखने वाले व्यक्ति के मन में डर पैदा करना होगा।
दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते रेप और दूसरे अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। सोमवार को इसी 'सुओ मोटो' मामले में जस्टिस जेबी पार्दीवाला की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि जरूरत पड़ने पर वे सख्त रुख अपनाएं।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे लोग भी होंगे जो आर्टिकल 21 की बात करेंगे, यानी वे मानवाधिकार समूह जो अपराधियों के साथ बुरे बर्ताव का विरोध करते हैं। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी ऐसे समूहों की परवाह किए बिना, रेप जैसे घिनौने अपराध करने वाले अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकते हैं।
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि जब तक आप अपराधियों के मन में यह डर पैदा नहीं करते कि 'अगर हमने ऐसा कुछ किया तो मारे जाएंगे', तब तक आप ऐसे अपराधों को रोक नहीं पाएंगे। आपको ऐसे अपराध करने की सोच रखने वाले व्यक्ति के मन में डर पैदा करने की जरूरत है।
जस्टिस जेबी पार्दीवाला ने कहा, "दुर्गा पूजा और दिवाली जैसी छुट्टियों के दौरान, ये बदमाश और गुंडे अधिक सक्रिय हो जाते हैं। आपको उनके मन में डर पैदा करना होगा।
उन्हें पकड़कर जेल में डालना ही एकमात्र समाधान नहीं है। अफसरों, हालात के मुताबिक अपनी जिम्मेदारी निभाएं। हमें निराश न करें। छेड़छाड़ या रेप का शिकार होने वाली हर महिला और लड़की हमारी बहन और मां के समान है। अपनी जिम्मेदारी निभाएं। इसे एक चुनौती के तौर पर लें। ऐसी घटनाओं को न होने दें।"
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से एनसीआर क्षेत्र में महिलाओं की सुरक्षा के बारे में जानकारी देते हुए एक एफिडेविट फाइल करने को कहा। मामले में 16 नवंबर को अगली सुनवाई होगी।





