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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:27 · नई दिल्ली संस्करण

अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी : केंद्र

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी : केंद्र

नई दिल्ली। सरकार ने सोमवार को बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात मूल्य के हिसाब से अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इस दौरान निर्यात बढ़कर 62,408 करोड़ रुपए हो गया, जो कि 2023-24 के 60,523.89 करोड़ रुपए की तुलना में 3.11 प्रतिशत अधिक है।

सरकार के अनुसार, अमेरिका द्वारा भारी शुल्क लगाए जाने के बावजूद चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भी निर्यात बढ़ रहा है।

इस बीच, मछली उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में मछली उत्पादन बढ़कर 197.75 लाख टन हो गया, जबकि वर्ष 2013-14 में यह 95.79 लाख टन था, यानी 106 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है।

अप्रैल 2025 से अमेरिका ने भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों पर शुल्क बहुत बढ़ा दिए हैं। खासकर झींगा निर्यात पर चरणबद्ध तरीके से शुल्क बढ़ाकर कुल 58.26 प्रतिशत कर दिया गया है। अमेरिका को होने वाले भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में झींगे की हिस्सेदारी करीब 90 प्रतिशत है।

इतनी बड़ी चुनौती के बावजूद भारत के समुद्री खाद्य क्षेत्र ने मजबूती और समझदारी दिखाई है और हालात के अनुसार प्रदर्शन किया है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, अप्रैल से अक्टूबर 2024 (टैरिफ लागू होने से पहले) और अप्रैल से अक्टूबर 2025 (टैरिफ लागू होने के बाद) की तुलना करने पर साफ दिखता है कि निर्यात बढ़ा है। इस दौरान समुद्री खाद्य निर्यात मूल्य में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह 35,107.6 करोड़ रुपए से बढ़कर 42,322.3 करोड़ रुपए हो गया। मात्रा के हिसाब से भी निर्यात 12 प्रतिशत बढ़कर 9.62 लाख टन से 10.73 लाख टन हो गया।

जमे हुए झींगे के निर्यात में भी मूल्य के हिसाब से 17 प्रतिशत और मात्रा के हिसाब से 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने कहा कि पिछले दशक में चलाई गई योजनाओं और सही नीतियों की वजह से मत्स्य क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल हुई हैं।

वर्ष 2014-15 से मत्स्य पालन विभाग द्वारा लागू की गई विभिन्न योजनाओं के तहत अब तक 74.66 लाख लोगों को रोजगार मिला है, जिसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दोनों शामिल हैं।

वर्तमान में भारत 130 देशों को 350 से अधिक प्रकार के समुद्री खाद्य उत्पाद निर्यात करता है, जिसमें मत्स्य पालन का योगदान निर्यात मूल्य का 62 प्रतिशत है। भारत अब उच्च मूल्य और प्रसंस्कृत समुद्री खाद्य उत्पादों का एक बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।

मंत्रालय के अनुसार, मूल्यवर्धित उत्पादों का योगदान भारत के कुल निर्यात में करीब 11 प्रतिशत है। पिछले 5 वर्षों में इन उत्पादों का निर्यात 56 प्रतिशत बढ़ा है, जो 4,863.40 करोड़ रुपए से बढ़कर 7,589.93 करोड़ रुपए हो गया है।

पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र में निवेश भी काफी बढ़ाया है।

सरकार ने बताया कि 38,572 करोड़ रुपए के निवेश को अलग-अलग योजनाओं के तहत मंजूरी दी गई है या घोषणा की गई है। इनमें ब्लू रिवोल्यूशन, मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) शामिल हैं।

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