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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:18 · नई दिल्ली संस्करण

भारत के रक्षा उत्पादन में 15.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी, वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हुआ

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
भारत के रक्षा उत्पादन में 15.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी, वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हुआ

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को बताया कि पिछले वित्त वर्ष में भारत का सालाना रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपए के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।

यह पिछले वित्तीय वर्ष के 1.54 लाख करोड़ रुपए के प्रोडक्शन के मुकाबले 15.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी है, और वित्तीय वर्ष 2020-21 (जब यह आंकड़ा 84,643 करोड़ रुपए था) के बाद से इसमें 110 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश में रक्षा उत्पादन वित्तीय वर्ष 2013-14 के 43,746 करोड़ रुपए से लगभग चार गुना बढ़ गया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत के रक्षा उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणादायक नेतृत्व को दिया।

'एक्स' पर एक पोस्ट में, मंत्री ने इस अहम उपलब्धि को हासिल करने के लिए रक्षा उत्पादन विभाग और पब्लिक व प्राइवेट सेक्टर की सामूहिक कोशिशों की तारीफ की।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह बढ़ती हुई रफ्तार देश के बढ़ते रक्षा औद्योगिक आधार का साफ संकेत है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि लगातार पॉलिसी सपोर्ट, कई नई पहलों, प्राइवेट सेक्टर की बढ़ती भागीदारी और बढ़ते एक्सपोर्ट की क्षमताओं के साथ, रक्षा प्रोडक्शन सेक्टर आने वाले सालों में और तेजी से आगे बढ़ने के लिए तैयार है।

कुल प्रोडक्शन में रक्षा पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (पीएसयू) और अन्य पीएसयू की हिस्सेदारी लगभग 76 प्रतिशत रही, जबकि प्राइवेट सेक्टर का योगदान 24 प्रतिशत रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 22 प्रतिशत से ज्यादा है।

वित्त वर्ष 2025-26 में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी लगभग 42,000 करोड़ रुपए के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है, जो रक्षा इकोसिस्टम में इसकी बढ़ती भूमिका को दिखाता है।

सालों में रक्षा प्रोडक्शन में हुई बढ़ोतरी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड रक्षा एक्सपोर्ट को हासिल करने में बहुत बड़ा योगदान दिया है।

रक्षा मंत्रालय ने कहा, "यह उपलब्धि पीएम मोदी के नेतृत्व में 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत रक्षा मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता के लिए सरकार की बढ़ती कोशिशों की रफ्तार को दिखाती है।"

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