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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:24 · नई दिल्ली संस्करण

भारत जल्द ही दुनिया की टॉप 3 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा: डॉ. जितेंद्र सिंह

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
भारत जल्द ही दुनिया की टॉप 3 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि वर्ष 2014 में 'कमजोर पांच' अर्थव्यवस्थाओं में गिने जाने से लेकर आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने तक का भारत का सफर देश के आत्मविश्वास, क्षमता और दिशा में बड़े बदलाव को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि भारत अब निकट भविष्य में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है और वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करेगा।

तिरुवनंतपुरम के कौडियार में पी. परमेश्वरन मेमोरियल लेक्चर देते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत 81वें स्थान पर था, जो अब बढ़कर 38वें स्थान पर पहुंच गया है।

देश में अब दो लाख से अधिक स्टार्टअप हैं, जो 21 लाख से ज्यादा रोजगार दे रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जब वर्ष 2015 में 'स्टार्टअप इंडिया' की घोषणा की गई थी, तब यह अवधारणा कई लोगों के लिए नई थी, लेकिन आज यह देशव्यापी आंदोलन बन चुका है।

इनमें से लगभग आधे स्टार्टअप टियर 2 और 3 स्तर के शहरों से उभर रहे हैं, और इनमें बड़ी संख्या महिला उद्यमियों द्वारा संचालित हैं।

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण पर पारंपरिक सोच में बदलाव आ रहा है।

आज महिला वैज्ञानिक और नवप्रवर्तक अंतरिक्ष, विज्ञान और शासन से जुड़े देश के कई प्रमुख राष्ट्रीय अभियानों का नेतृत्व कर रही हैं।

अनुसंधान के क्षेत्र में डॉ. सिंह ने कहा कि पेटेंट आवेदन के मामले में भारत दुनिया में छठे स्थान पर है और इनमें से 60 प्रतिशत से अधिक आवेदन भारतीयों द्वारा दायर किए गए हैं।

वैज्ञानिक प्रकाशनों के मामले में भी भारत शीर्ष देशों में शामिल है और बड़ी संख्या में शोध पत्रों को वैश्विक स्तर पर उद्धृत किया जा रहा है। हजारों भारतीय वैज्ञानिक दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल हैं, जो भारतीय वैज्ञानिक प्रतिभा की वैश्विक पहचान को दर्शाता है।

मंत्री ने कहा कि नीतिगत सुधारों से निजी क्षेत्र की भागीदारी के नए रास्ते खुले हैं, जिससे भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में तेज विस्तार हुआ है।

रक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताएं भी काफी बढ़ी हैं, निर्यात में वृद्धि हुई है और आत्मनिर्भरता मजबूत हुई है।

उन्होंने आगे कहा कि समुद्री संसाधनों, गहरे समुद्र के खनिजों और जैव विविधता की खोज भविष्य में राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के मूल्य संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'विकसित भारत' को आज के युवा ही आकार देंगे।

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