मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:42 · नई दिल्ली संस्करण

देश को मिलने जा रही है पहली राष्ट्रीय सहकारी यूनिवर्सिटी 'त्रिभुवन', अमित शाह कल करेंगे शिलान्यास

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

देश को मिलने जा रही है पहली राष्ट्रीय सहकारी यूनिवर्सिटी 'त्रिभुवन', अमित शाह कल करेंगे शिलान्यास

आणंद, गुजरात | 4 जुलाई 2025

भारत के सहकारिता क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल की शुरुआत होने जा रही है। कल शनिवार, 5 जुलाई 2025 को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह गुजरात के आणंद में देश की पहली राष्ट्रीय सहकारी यूनिवर्सिटी — ‘त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी’ (TSU) — की आधारशिला रखेंगे। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्रभाई पटेल, विधानसभा अध्यक्ष श्री शंकर चौधरी, केंद्रीय राज्य मंत्री श्री कृष्णपाल गुर्जर और श्री मुरलीधर मोहोळ, शिक्षा मंत्री श्री ऋषिकेश पटेल, सहकारिता मंत्री श्री जगदीश विश्वकर्मा, सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी, TSU के कुलपति डॉ. जे.एम. व्यास सहित कई अन्य विशिष्ट अतिथि भी उपस्थित रहेंगे।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में 'सहकार से समृद्धि' के विजन को साकार करने की दिशा में यह यूनिवर्सिटी एक ऐतिहासिक मील का पत्थर मानी जा रही है। इसका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र में पेशेवर और प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार करना है, जो भविष्य में सहकारी संस्थाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बना सके।

इस यूनिवर्सिटी में सहकारी प्रबंधन, वित्त, कानून, ग्रामीण विकास और नवाचार जैसे विषयों पर विशेष शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के अवसर मिलेंगे। यह संस्थान पीएचडी से लेकर सर्टिफिकेट स्तर तक के बहुविषयक पाठ्यक्रम उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही यह यूनिवर्सिटी देशभर में 200 से अधिक सहकारी संस्थानों को जोड़कर एक राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार करेगी, जिससे सहकारी शिक्षा को एक नई पहचान और गुणवत्ता मिल सके।

अमित शाह कल "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के तहत वृक्षारोपण भी करेंगे और साथ ही NCERT द्वारा तैयार सहकारिता शिक्षा मॉड्यूल का अनावरण भी करेंगे, जिसका उद्देश्य स्कूली छात्रों को सहकारिता आंदोलन से जोड़ना है।

यूनिवर्सिटी का लक्ष्य है कि अगले 5 वर्षों में करीब 20 लाख सहकारी कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाए। इसके अलावा, शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए सहकारिता आधारित पीएचडी कार्यक्रमों के माध्यम से मजबूत फैकल्टी बेस तैयार किया जाएगा।

इस यूनिवर्सिटी के साथ ही एक अनुसंधान एवं विकास परिषद (R&D Council) भी बनाई जाएगी, जो नवाचार और किफायती तकनीकों पर काम करेगी। यह परिषद अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ भी समन्वय कर भारत में विश्वस्तरीय सहकारी मॉडल विकसित करने में सहायक होगी।

त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी एक शैक्षणिक संस्थान तो रहेगा ही , परन्तु भारत के सहकारी आंदोलन को आधुनिक दिशा देने वाला एक प्लेटफॉर्म भी होगा, जो आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में एक मजबूत आधार बनेगा।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें