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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:34 · नई दिल्ली संस्करण

आईआईटी खड़गपुर में हिंदी टंकण प्रतियोगिता और कार्यशाला आयोजित, कार्यालयों में हिंदी प्रयोग पर जोर

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
आईआईटी खड़गपुर में हिंदी टंकण प्रतियोगिता और कार्यशाला आयोजित, कार्यालयों में हिंदी प्रयोग पर जोर

खड़गपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के राजभाषा विभाग और नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), खड़गपुर के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी टंकण प्रतियोगिता और हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य कार्यालयी कार्यों में हिंदी के प्रभावी उपयोग और हिंदी टंकण दक्षता को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम के पहले चरण में आईआईटी खड़गपुर के तक्षशिला परिसर स्थित सीआईसी प्रयोगशाला में हिंदी टंकण प्रतियोगिता आयोजित हुई। इसमें नराकास खड़गपुर से जुड़े विभिन्न सदस्य कार्यालयों के कुल 23 अधिकारियों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।

इसके बाद विक्रमशिला परिसर स्थित गार्गी सभा सभागार में “कार्यालय में हिंदी में कार्य करने के लिए कंप्यूटिंग टूल्स” विषय पर हिंदी कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का आयोजन आईआईटी खड़गपुर के राजभाषा विभाग की ओर से किया गया। इसमें विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अशोक मिश्रा के अलावा रेलवे, वायु सेना स्टेशन कलाईकुंडा, विभिन्न बैंकों और अन्य सदस्य कार्यालयों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला में करीब 80 अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ केंद्रीय विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी भागीदारी की।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता गृह मंत्रालय, भारत सरकार के राजभाषा विभाग की हिंदी शिक्षण योजना के उपनिदेशक (हिंदी टंकण एवं आशुलिपि) डॉ. जितेंद्र प्रसाद थे। उन्होंने कार्यालयी कार्यों में हिंदी के आसान और प्रभावी उपयोग के लिए आधुनिक कंप्यूटिंग टूल्स की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही हिंदी टंकण सीखने की सरल और वैज्ञानिक विधियां तथा टंकण गति बढ़ाने के व्यावहारिक उपाय भी बताए।

डॉ. जितेंद्र प्रसाद ने कहा कि हिंदी टंकण काफी सहज है, क्योंकि हिंदी का जैसा उच्चारण होता है, उसी प्रकार यूनिकोड आधारित कीबोर्ड पर उसका टंकण किया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि फोनेटिक की-बोर्ड के बजाय मानक इनस्क्रिप्ट और यूनिकोड आधारित हिंदी कीबोर्ड को प्राथमिकता दें।

उन्होंने बताया कि फोनेटिक टंकण प्रणाली अपनाने पर उपयोगकर्ता अपनी वास्तविक क्षमता का लगभग 27 प्रतिशत ही उपयोग कर पाते हैं, जबकि मानक यूनिकोड आधारित प्रणाली से हिंदी में कार्य अधिक तेज, सरल और दक्षतापूर्वक किया जा सकता है।

कार्यशाला को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए डॉ. जितेंद्र प्रसाद ने प्रतिभागियों को मंच पर बुलाकर हिंदी टंकण का प्रत्यक्ष अभ्यास भी कराया। इस प्रायोगिक सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों ने टंकण की तकनीकों को समझा और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।

समापन अवसर पर प्रतिभागियों, अतिथियों और उपस्थित अधिकारियों-कर्मचारियों को स्मृति-चिह्न के रूप में उपयोगी पुस्तकें भेंट की गईं। इसका उद्देश्य हिंदी भाषा, राजभाषा कार्यान्वयन और ज्ञानवर्धक साहित्य के अध्ययन के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करना था। प्रतिभागियों ने इस पहल को उपयोगी और प्रेरणादायी बताया।

कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ हिंदी अधिकारी डॉ. राजीव कुमार रावत ने किया। अंत में वरिष्ठ हिंदी अनुवादक सुकन्या शर्मा ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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