जानवर समझकर फेंका गया था इंसान का मांस, 4 साल बाद खुला हत्या का राज

शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ पुलिस की शुरुआती लापरवाही के कारण एक युवक की हत्या का सच चार साल तक दबा रहा। 19 दिसंबर 2020 को नईम नामक व्यक्ति की मोबाइल शॉप में आग लगने की सूचना मिली थी। आग बुझाने के बाद दुकान से जला हुआ मांस का एक टुकड़ा मिला, जिसे पुलिस ने जानवर का मांस मानते हुए तालाब के किनारे फिंकवा दिया। केवल एक छोटा हिस्सा फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया।
घटनास्थल से जला हुआ अंडरवियर, हाथ का कड़ा और ताबीज भी बरामद हुए थे, जिन्हें पुलिस ने सील कर दिया। मामला ठंडे बस्ते में चला गया, लेकिन कुछ दिनों बाद एक व्यक्ति ने आशंका जताई कि ये सामान उनके बेटे अभिषेक यादव का हो सकता है, जो उस समय से लापता था।
साल 2022 में जब पुलिस ने सील की गई पोटली खोली, तो परिजनों ने सामान की पहचान अभिषेक यादव के रूप में कर ली। इसके बाद डीएनए जांच के लिए नमूने फॉरेंसिक लैब भेजे गए। हाल ही में आई रिपोर्ट में डीएनए मैच हो गया, जिससे यह साफ हो गया कि जिस मांस को पुलिस ने जानवर का समझकर फेंक दिया था, वह इंसान—अभिषेक यादव—का था।
डीएनए रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने अब हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में स्पष्ट हुआ है कि अभिषेक यादव की हत्या कर उसकी लाश को मोबाइल शॉप के अंदर जला दिया गया था, ताकि सबूत मिटाए जा सकें।
यह मामला न केवल एक जघन्य अपराध की कहानी बयां करता है, बल्कि शुरुआती जांच में हुई गंभीर चूक पर भी सवाल खड़े करता है। अब पुलिस पुराने सबूतों और संदिग्धों के आधार पर पूरे मामले की दोबारा गहन जांच कर रही है।





