राज्यपाल ने नैक एवं एनआईआरएफ में बेहतर प्रदर्शन के लिए विश्वविद्यालय व कालेजाें के समन्वय पर दिया जोर

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में बुधवार को जन भवन के गांधी सभागार में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी से संबद्ध शासकीय एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों की समीक्षा बैठक हुई।
बैठक में संबंधित महाविद्यालयों द्वारा प्रस्तुतीकरण भी दिया गया।
बैठक में महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की कम संख्या, शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात, महाविद्यालयों को उत्कृष्टता की दिशा में आगे ले जाने में विश्वविद्यालय की भूमिका, पाठ्यक्रमों की प्रासंगिकता, भविष्य की शैक्षणिक योजनाएं तथा विद्यार्थियों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
इसके अतिरिक्त पुस्तकालय एवं प्रयोगशालाओं की स्थिति, स्वीकृत पदों के सापेक्ष भरे एवं रिक्त पद, कार्यशालाएं, सेमिनार, शोध कार्य, पेटेंट, प्रकाशन, संयुक्त शोध एवं संयुक्त प्रकाशनों से संबंधित विषयों की भी विस्तृत समीक्षा की गई।
राज्यपाल ने महाविद्यालयों की गुणवत्ता सुधार एवं समग्र विकास के लिए कहा कि महाविद्यालयों में नैक एवं एनआईआरएफ की तैयारी में जो भी कमियां हैं, उनकी विस्तृत सूची विश्वविद्यालय स्तर पर तैयार की जाए तथा उन्हें दूर करने हेतु नियमित रूप से ऑनलाइन कार्यशालाएं एवं समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएं। उन्होंने विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के बीच समन्वय बढ़ाने पर बल देते हुए कहा कि जहां विश्वविद्यालय में अच्छी शैक्षणिक प्रवृत्तियां हों, वहां महाविद्यालयों को आमंत्रित किया जाए तथा जहां महाविद्यालयों में उत्कृष्ट कार्य हो रहे हों, वहां विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं जाकर उनसे सीखें।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय महाविद्यालयों को हर संभव सहयोग प्रदान करें, ताकि वे गुणवत्ता एवं उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय स्वयं भी विश्वविद्यालय से संपर्क कर मार्गदर्शन प्राप्त करें।
जहां अध्यापकों की कमी है, वहां उनकी संख्या बढ़ाने तथा जहां आधारभूत संरचना एवं मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, उन्हें सुदृढ़ करने हेतु शासन स्तर पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
राज्यपाल ने निर्देश दिया कि एलुमनाई फंड एवं विद्यार्थियों से संबंधित अन्य निधियों का उपयोग पूर्ण पारदर्शिता के साथ केवल विद्यार्थियों के हित में किया जाए।
उन्होंने समय के अनुरूप पुरानी नीतियों एवं नियमों की समीक्षा कर उन्हें परिवर्तित करने तथा वर्तमान आवश्यकताओं के अनुसार नई नीतियां एवं शासनादेश बनाने पर बल दिया और कहा कि निरंतर परिवर्तन ही विकास का आधार है।





