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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:33 · नई दिल्ली संस्करण

कोटा न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत पर सरकार की बड़ी कार्रवाई

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
कोटा न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत पर सरकार की बड़ी कार्रवाई

कोटा। कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद प्रसूताओं की मौत और कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के गंभीर प्रकरण को राज्य सरकार ने अत्यंत संवेदनशीलता से लेते हुए त्वरित सख्त कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर मामले की निष्पक्ष जांच शुरू कर दी गई है, जबकि चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने पूरे घटनाक्रम की लगातार मॉनिटरिंग करते हुए उपचाराधीन मरीजों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।प्रारंभिक जांच में चिकित्सा प्रोटोकॉल और उपचार प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही सामने आने पर राज्य सरकार ने एक वरिष्ठ चिकित्सक और दो नर्सिंगकर्मियों को निलंबित कर दिया है, जबकि यूटीबी पर कार्यरत एक चिकित्सक को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। सह आचार्य जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. नवनीत कुमार को निलंबित किया गया है। वहीं यूटीबी चिकित्सक डॉ. श्रद्धा उपाध्याय को सेवा से हटाया गया है।इसके अलावा ड्यूटी पर तैनात सीनियर नर्सिंग अधिकारी गुरजौत कौर और निमेश वर्मा को भी कार्य में लापरवाही, मरीजों की निगरानी में कमी और चिकित्सा प्रोटोकॉल की अनुपालना में शिथिलता के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनका मुख्यालय जयपुर किया गया है।सरकार ने स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के यूनिट हेड डॉ. बीएल पटीदार और डॉ. नेहा सीहरा को कारण बताओ नोटिस जारी कर पर्यवेक्षणीय जिम्मेदारी, उपचार मॉनिटरिंग और पोस्ट-ऑपरेटिव देखरेख में संभावित लापरवाही पर जवाब मांगा है।चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल ने कोटा पहुंचकर अस्पताल की व्यवस्थाओं, उपचार प्रक्रिया और प्रशासनिक समन्वय की विस्तृत समीक्षा की। प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने अस्पताल प्रशासन को ऑपरेशन थिएटर प्रबंधन, एनेस्थीसिया प्रोटोकॉल, दवा वितरण प्रणाली और पोस्ट-ऑपरेटिव मॉनिटरिंग व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले सभी अधिकारियों, चिकित्सकों और कार्मिकों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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