सरकार कानून में संशोधन के लिए तैयार: छठे दौर की बैठक खत्म, अगली मुलाकात चार जनवरी को
दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों का आंदोलन आज 35वें दिन में प्रवेश कर चुका है। शीतलहर और घटता तापमान भी उनका हौसला नहीं तोड़ सका है। आज सबकी निगाहें किसान नेताओं और सरकार के बीच होने वाली छठे दौर की बैठक पर टिकी हैं। बैठक की सफलता और असफलता पर ही इस आंदोलन का भविष्य टिका है। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली की जिन सीमाओं पर किसान प्रदर्शन कर रहे हैं वहां उनके समर्थकों का जमावड़ा बढ़ता ही जा रहा है। अब इस आंदोलन की लहर बिहार भी पहुंच चुकी है जहां से किसी तरह के प्रदर्शन की बात अब तक सामने नहीं आ रही थी।
सिंघु बॉर्डर पहुंचे पंजाबी गायक जैजी बी
पंजाबी गायक जैजी बी ने आज देर शाम सिंघु बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि मैं रोज प्रदर्शन के वीडियो देखता था। किसान जो सभी का पेट भरते हैं, उनके लिए हम यहां आए हैं। मेरी सरकार से विनती है कि तीनों कृषि कानून वापिस लिए जाएं।
इन दो कानूनों पर बनी सहमती
इस बार सरकार ने यह साफ कर दिया है कि पराली के कानून से किसानों को अलग रखा जाएगा। इसके साथ ही आने वाले बिजली बिल के कानून को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट किया कि उसमें किसानों की मांगों को ध्यान में रखा जाएगा।
दो मांगों पर बनी सरकार और किसानों की सहमती
किसान आंदोलन के मुख्यत: चार मुद्दे हैं, जिनमें से दो पर आज की बैठक में सरकार और किसानों की सहमती बन गई है। सरकार ने किसानों के दो मुद्दों को मान लिया है। इनमें से एक पराली और दूसरी बिजली बिल का मुद्दा है।
किसानों के अनुशासन की हुई तारीफ
कृषि मंत्री ने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि किसान यूनियन के नेताओं ने आंदोलन में पर्याप्त अनुशासन बनाए रखने का प्रयत्न किया है। मुझे विश्वास है कि वे आगे भी ऐसा करेंगे।
हम चार जनवरी को अपनी चर्चा को आगे बढ़ाएंगे: तोमर
तोमर ने कहा कि हम चार जनवरी को दोपहर दो बजे एक बार फिर इकट्ठा होंगे और एमएसपी पर चर्चा को आगे बढ़ाएंगे।
एमएसपी पर चर्चा जारी है: तोमर
इस बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि हम पहले भी कहते रहे हैं कि एमएसपी जारी है, जारी रहेगी। सर यह लिखित में भी देने को तैयार है। लेकिन किसानों को लगता है कि एमएसपी को कानूनी दर्जा मिलना चाहिए। इसपर अभी पूरी चर्चा बाकी है।
किसानों और सरकार की बातचीत खत्म
किसानों और सरकार के बीच सातवें दौर की बातचीत खत्म हो गई है। अगली बैठक चार जनवरी को निर्धारित की गई है।
अब भी नहीं निकला कोई नतीजा
किसान नेताओं और सरकार की कई घंटों की बैठक के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला है। सरकार ने कहा है कि कानून बनाने और खत्म करने की लंबी प्रक्रिया है, मांगों पर चर्चा के लिए समिति बनाने की पेशकश की गई है।
हम पीएम का सिर नीचे नहीं करना चाहते बशर्ते वह भी किसानों का सम्मान बनाए रखें : नरेश टिकैत
आंदोलन के 35वें दिन हुई महापंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन का निष्कर्ष निकलना चाहिए नहीं तो किसान बिरादरी बर्बाद हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी किसान संगठन हल नहीं निकलने तक आंदोलन पर डटे रहें। वार्ता में राजनाथ सिंह, लालकृष्ण आडवाणी जैसे बुजुर्ग नेताओं को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार दो कदम पीछे हटे तो किसान ढाई कदम पीछे हटने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री का सर नीचे नहीं करना चाहते बशर्ते की वह भी किसान का सम्मान बनाए रखें और किसानों की सभी मांगों को मानें।
सरकार ने किसानों को दिया कमेटी बनाने का प्रस्ताव
बातचीत के दौरान सरकार ने किसान नेताओं से कहा है कि किसानों द्वारा कृषि कानून को लेकर उठाई जा रही मांगों पर विचार के लिए एक कमेटी बनाई जा सकती है।





