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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:40 · नई दिल्ली संस्करण

वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल से बाजार दबाव में, सेंसेक्स-निफ्टी 2% से ज्यादा टूटे

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल से बाजार दबाव में, सेंसेक्स-निफ्टी 2% से ज्यादा टूटे

मुंबई,। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में एक और सप्ताह भारी गिरावट दर्ज की गई और प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए।

इस सप्ताह एनएसई निफ्टी 50 2.2 प्रतिशत यानी 532 अंक गिरकर पिछले शुक्रवार के बंद भाव के मुकाबले 23,643.5 पर बंद हुआ, तो वहीं बीएसई सेंसेक्स 2.7 प्रतिशत यानी 2,000 अंकों से ज्यादा टूटकर 75,238 पर बंद हुआ।

इस बीच, व्यापक बाजार पर और ज्यादा दबाव देखने को मिला। मिडकैप इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 4 प्रतिशत टूट गया।

सेक्टोरल आधार पर रियल्टी शेयर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। बीएसई रियल्टी के शेयरों में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।

इसके अलावा, आईटी शेयरों पर भी दबाव बना रहा, बीएसई आईटी इंडेक्स में 5.7 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके बाद ऑटो, कैपिटल गुड्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी देखी गई।

बैंकिंग और पीएसयू शेयरों में भी बिकवाली का दबाव रहा। बीएसई बैंकेक्स और बीएसई पीएसयू, दोनों में करीब 3-3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

हालांकि, कुछ डिफेंसिव सेक्टर बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहे, जिसमें बीएसई मेटल में 1.5 प्रतिशत की बढ़त रही, जबकि हेल्थकेयर शेयरों में 1.4 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

30 शेयरों वाले सेंसेक्स पैक में टाइटन कंपनी सबसे बड़ा नुकसान झेलने वाला शेयर रहा, जिसमें 7.6 प्रतिशत की गिरावट आई।

इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज, टेक महिंद्रा और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में भी कमजोरी रही।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया तनाव में कोई ठोस कमी नहीं आने और उसके कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई और रुपए पर असर को लेकर निवेशकों में चिंता बनी हुई है।

विशेषज्ञों ने कहा कि ऊंचे कच्चे तेल के दाम, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती का असर उभरते बाजारों पर पड़ रहा है, जिसके चलते विदेशी निवेशकों की बिकवाली और मुद्रा पर दबाव देखने को मिल रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि थोक महंगाई में बढ़ोतरी, ईंधन कीमतों का असर और ऊंची बॉन्ड यील्ड ने भविष्य की मौद्रिक नीति और आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

वैश्विक संकेत भी कमजोर बने रहे क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं मिले।

इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई बाधित होने की आशंका के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहीं।

हालांकि बाजार में गिरावट के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को कुछ सहारा दिया।

मजबूत रिटेल निवेश और व्यवस्थित निवेश योजना (एसआईपी) के जरिए लगातार निवेश बाजार के लिए समर्थन बना रहा।

इसके अतिरिक्त, अप्रैल में एसआईपी निवेश 31,115 करोड़ रुपए रहा, जिसने विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफएफआई) की लगातार बिकवाली के असर को काफी हद तक संभालने में मदद की।

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