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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:21 · नई दिल्ली संस्करण

Bihar में मानवता शर्मसार! 16 साल की लड़की के शव को ट्रैक्टर के पीछे बोरे में बांधकर ले गई पुलिस,

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
Bihar में मानवता शर्मसार!  16 साल की लड़की के शव को ट्रैक्टर के पीछे बोरे में बांधकर ले गई पुलिस,

बिहार के रोहतास जिले के सासाराम से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने इंसानियत और सरकारी सिस्टम दोनों को शर्मसार कर दिया है। यहां पुलिस ने 16 साल की एक लड़की के शव को ट्रैक्टर के पीछे लगे खेत जोतने वाले लोहे के 'हल' पर बोरे में बांधकर करीब 20 किलोमीटर तक अस्पताल पहुंचाया। रास्ते भर लोग यह दिल दहला देने वाला मंजर देखते रहे। मामला बड्डी थाना क्षेत्र के डूमरखोह जंगल का है। जंगल में मौजूद एक पुराने कुएं से 16 वर्षीय लक्ष्मी कुमारी का शव बरामद हुआ था। लक्ष्मी मूल रूप से बिक्रमगंज के मानी गांव की रहने वाली थी।

बताया जा रहा है कि करीब 2 महीने पहले उसने बड्डी के विश्रामपुर निवासी पिंकू बिंद से प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद वह पति के साथ डूमरखोह जंगल के पास ही झोपड़ी बनाकर रह रही थी।कुछ दिन पहले परिजनों को सूचना मिली कि लक्ष्मी लापता है। तलाश करने पर उसका शव जंगल के एक सुनसान कुएं में मिला। सूचना पर बड्डी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कुएं से बाहर निकलवाया। शव को बाहर निकालने के बाद सबसे शर्मनाक घटना हुई। पुलिस के पास शव को ले जाने के लिए न तो शव वाहन था और न ही एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। आरोप है कि पुलिस ने वहीं खड़े एक ट्रैक्टर के पीछे लगे कृषि यंत्र 'हल' के ऊपर बोरे में शव को रखकर रस्सी से बांध दिया और उसी हालत में सासाराम सदर अस्पताल के लिए रवाना कर दिया।

लगभग 20 किलोमीटर के सफर के दौरान शव लोहे के हल पर बंधा हुआ घिसटता रहा, जिससे शव की स्थिति और भी खराब हो गई। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने भी पोस्टमार्टम करने से इनकार कर दिया। सासाराम सदर अस्पताल में तैनात डॉक्टर अजित कुमार ने बताया कि शव बहुत ज्यादा सड़-गल चुका था और खराब हालत में था, इसलिए यहां पोस्टमार्टम संभव नहीं है। इसके बाद शव को फॉरेंसिक पोस्टमार्टम के लिए पटना मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया है। इस घटना ने बिहार सरकार की शव वाहन योजना के दावों की पोल खोल दी है।

सरकार हर जिले में मुफ्त शव वाहन देने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पुलिस को एक बच्ची का शव ले जाने के लिए ट्रैक्टर के हल का सहारा लेना पड़ा। स्थानीय लोगों में पुलिस की इस अमानवीयता को लेकर भारी आक्रोश है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या एक बेटी को मौत के बाद सम्मानजनक अंतिम सफर का भी अधिकार नहीं है? फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच और लक्ष्मी की मौत के कारणों का पता लगाने में जुटी है।

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