फ्रांस का इज़राइल को 24 घंटे में दूसरा बड़ा झटका: अब सीरिया की संप्रभुता की रक्षा में उतरे राष्ट्रपति मैक्रों
पश्चिम एशिया में नया कूटनीतिक मोड़, इज़राइल की नीतियों पर वैश्विक प्रतिक्रिया तेज
पश्चिम एशिया में तनाव और टकराव के माहौल के बीच फ्रांस ने 24 घंटे के भीतर इज़राइल को दूसरा बड़ा कूटनीतिक झटका दिया है। पहले फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने का ऐतिहासिक ऐलान कर इज़राइल की वैश्विक स्थिति को चुनौती दी गई, और अब फ्रांस ने अमेरिका और सीरिया के साथ मिलकर एक साझा बयान जारी किया है, जिसमें सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और राजनीतिक एकता की रक्षा का संकल्प व्यक्त किया गया है।
यह साझा बयान केवल औपचारिक नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया की बदलती राजनीतिक समीकरणों की ओर स्पष्ट संकेत है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने साफ कर दिया है कि उनका देश सीरिया के किसी भी प्रकार के विभाजन या विदेशी हस्तक्षेप का विरोध करता है। अमेरिका और सीरिया की सहमति के साथ फ्रांस अब क्षेत्रीय स्थायित्व और शांति की दिशा में एक निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार दिख रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, फ्रांस की यह दोहरी कार्रवाई इज़राइल की उस विदेश नीति पर गहरा प्रहार है जो फिलिस्तीन और सीरिया दोनों क्षेत्रों में आक्रामक रुख अपनाती रही है। अब जब फ्रांस जैसा यूरोपीय राष्ट्र फिलिस्तीन को राष्ट्र के रूप में मान्यता देने और सीरिया की अखंडता की रक्षा के लिए कदम उठा रहा है, तब यह स्पष्ट हो गया है कि इज़राइल की नीति को वैश्विक मंच पर समर्थन मिलने में गिरावट आई है।
इधर, संयुक्त राष्ट्र में भी फिलिस्तीन के पक्ष में वैश्विक समर्थन बढ़ता दिख रहा है। फ्रांस का यह रुख न केवल पश्चिम एशिया के शांति प्रयासों को मजबूती देगा, बल्कि यह संदेश भी देगा कि मानवाधिकार, संप्रभुता और न्याय को लेकर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी अब मुखर होती जा रही है।
साफ है कि अब इज़राइल को अपनी विदेश नीति और सैन्य रवैये पर वैश्विक दबाव का सामना करना पड़ेगा। वहीं, फ्रांस ने मैक्रों के नेतृत्व में अपनी भूमिका को केवल यूरोपीय शक्ति तक सीमित न रखकर, अब वैश्विक संतुलन के केंद्र में स्थापित करना शुरू कर दिया है।
यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की राजनीति, कूटनीति और संघर्षों की दिशा को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है।





