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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:48 · नई दिल्ली संस्करण

महाकाल के दरबार में पहुंचे फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर, भस्म आरती में हुए शामिल

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
महाकाल के दरबार में पहुंचे फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर, भस्म आरती में हुए शामिल

उज्जैन,। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के प्रसिद्ध फिल्म निर्माता एवं निर्देशक मधुर भंडारकर ने भगवान महाकाल की दिव्य भस्म आरती में शामिल होकर पूजा-अर्चना की। करीब दो घंटे तक नंदी हॉल में बैठकर उन्होंने भस्म आरती के अलौकिक दर्शन किए और भगवान महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। दर्शन के बाद उन्होंने नंदी महाराज का विधि-विधान से पूजन-अभिषेक किया तथा परंपरा के अनुसार नंदी के कान में अपनी मनोकामना भी कही।

मधुर भंडारकर सोमवार तड़के करीब तीन बजे इंदौर से उज्जैन पहुंचे। वे इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद सीधे श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। भस्म आरती के उपरांत उन्होंने चांदी द्वार से पुजारी के माध्यम से भगवान महाकाल को जल अर्पित किया और नंदी महाराज का पूजन किया। दर्शन के पश्चात श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से उनका स्वागत कर प्रसाद और सम्मान भेंट किया गया।

भंडारकर ने मीडिया से कहा कि उन्हें हर वर्ष बाबा महाकाल के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इस बार भी इंदौर में एक कार्यक्रम होने के कारण वे महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल के दर्शन से उन्हें हमेशा आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और अपार खुशी मिलती है। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में युवा श्रद्धालुओं को पूरे उत्साह के साथ "बम-बम भोले" के जयकारे लगाते देखना अत्यंत सुखद और प्रेरणादायक अनुभव होता है। उन्होंने बाबा महाकाल से सभी के सुख, समृद्धि और मंगल की कामना भी की।

जटाधारी स्वरूप में सजे बाबा महाकालः इधर, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर सोमवार तड़के सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही भगवान महाकाल की दैनिक पूजन परंपरा प्रारंभ हुई। सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक संपन्न कराया गया। प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया तथा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान एवं पूजन किया गया।

कपूर आरती के पश्चात भगवान महाकाल को जटाधारी स्वरूप में दिव्य शृंगार से अलंकृत किया गया। उनके मस्तक पर रजत चंद्र, त्रिपुंड, भांग और चंदन अर्पित किया गया। गुलाब के सुगंधित पुष्पों की मालाएं पहनाई गईं तथा रजत मुकुट से शृंगार किया गया। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से पवित्र भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं।

भस्म अर्पण के उपरांत भगवान महाकाल का राजा स्वरूप में भव्य शृंगार किया गया। उन्हें भांग, ड्रायफ्रूट, रजत आभूषण, शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाला, रुद्राक्ष की मालाएं तथा विभिन्न सुगंधित पुष्प अर्पित किए गए। इसके बाद फल और मिष्ठान का भोग लगाकर महाआरती संपन्न हुई।

भस्म आरती में देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया और नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं भी कहीं। पूरे मंदिर परिसर में "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष लगातार गूंजते रहे, जिससे संपूर्ण वातावरण शिवमय और भक्तिमय बना रहा।

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