दिल्ली में फैक्ट्री लाइसेंसिंग प्रक्रिया होगी अब और सरल, पारदर्शी और उद्योग-हितैषी

दिल्ली में फैक्ट्री लाइसेंसिंग प्रक्रिया होगी अब और सरल, पारदर्शी और उद्योग-हितैषी
नई दिल्ली, 3 जुलाई 2025 : दिल्ली सरकार अब फैक्ट्री लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और उद्योग-हितैषी बनाने जा रही है, जिससे राजधानी में व्यापार और निवेश को नया बल मिलेगा। यह निर्णय दिल्ली में छोटे, मझौले और सूक्ष्म उद्योगों (MSME) को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं के लिए नए रोजगार अवसरों के द्वार भी खोलेगा।
नई नीति के तहत एक बड़ी राहत यह दी गई है कि यदि किसी एक इमारत के विभिन्न फ्लोर पर एक ही मालिक द्वारा, एक ही GST नंबर के तहत, एक समान उत्पादन प्रक्रिया चलाई जा रही है, तो अब अलग-अलग मंजिलों के लिए अलग-अलग लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी। यह बदलाव खासकर उन उद्यमियों के लिए लाभकारी होगा, जो सीमित जगह में अपनी इकाई का संचालन करते हैं और अभी तक जटिल प्रक्रियाओं से जूझ रहे थे।
इसके साथ ही सरकार ने इंडस्ट्रियल रिलोकेशन क्षेत्रों जैसे नरेला, बावना और बदली में स्थित फैक्ट्रियों को भी राहत दी है। अब वहाँ पर किराए पर काम कर रहे या उप-लीज पर चलने वाले उद्यमियों को भी फैक्ट्री लाइसेंस दिया जाएगा, बशर्ते वे पर्यावरण और सुरक्षा मानकों (जैसे DPCC और अग्नि सुरक्षा NOC) का पालन करते हों। इस कदम से लगभग 25,000 से अधिक यूनिट्स को कानूनी मान्यता मिलेगी और वे बैंक फाइनेंसिंग, सरकारी योजनाओं तथा सब्सिडी का लाभ उठा सकेंगे।
सरकार का मानना है कि लाइसेंसिंग प्रक्रिया में यह सरलीकरण न केवल प्रशासनिक बोझ को कम करेगा, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाओं को भी न्यूनतम करेगा। एकल आवेदन प्रणाली और स्पष्ट नियमों के चलते अब उद्यमियों को अनुमति प्राप्त करने के लिए अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने होंगे।
इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने अन्य व्यावसायिक गतिविधियों जैसे होटल, गेस्ट हाउस, ऑडिटोरियम आदि की लाइसेंस प्रक्रिया को भी दिल्ली पुलिस से हटाकर नगर निगमों के अधीन कर दिया है। इससे पुलिस अपने मूल कार्य—कानून व्यवस्था पर अधिक ध्यान दे सकेगी और लाइसेंसिंग प्रक्रिया नागरिक निकायों के माध्यम से अधिक कुशल और जवाबदेह तरीके से संचालित होगी।
कुल मिलाकर, दिल्ली सरकार की यह पहल न केवल "ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस" को बढ़ावा देती है, बल्कि राजधानी को एक निवेश-अनुकूल, रोजगार-उन्मुख और पारदर्शी औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इन सुधारों से दिल्ली न केवल MSME के लिए आदर्श स्थल बनेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल के रूप में भी उभरेगा।





