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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 5:54 · नई दिल्ली संस्करण

नई शिक्षा नीति के साथ कृषि शिक्षा व शोध को बढ़ाएं: तोमर

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के अंतर्गत विकसित "कृषि मेघ” सहित तीन महत्वपूर्ण सुविधाओं का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं के माध्यम से डिजीटल इंडिया संकल्पना की कड़ी में कृषि क्षेत्र में कम्प्युटिंग के युग की शुरुआत हो गई है। कृषि मेघ के अंतर्गत, बरसों के कृषि संबंधी अनुसंधान का डाटा अब एक ही डिजीटल प्लेटफार्म पर मिल सकेगा, जिसका उपयोग करते हुए तरक्की के नए आयाम हासिल किए जा सकेंगे।

तोमर ने मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए इन सुविधाओं की शुरुआत करते हुए कहा कि यह प्लेटफार्म बहुत सुविधाजनक होगा, जिससे देश के लिए योगदान में सहभागिता रहेगी। उन्होंने नई शिक्षा नीति के साथ कदमताल मिलाते हुए कृषि शिक्षा और शोध कार्यों को बढ़ावा दिए जाने की बात पर भी जोर दिया।

तोमर ने जिन सुविधाओं का शुभारंभ किया, उसमे कृषि मेघ (एनएआरईएस- क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर एंड सर्विसेज), उच्च कृषि शैक्षिक संस्थानों की प्रत्यायन प्रणाली पोर्टल और कृषि विश्वविद्यालय छात्र एलुमिनाई नेटवर्क (केवीसी एलूनेट) शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये नई सुविधाएं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के इतिहास में बहुत बड़ा कदम है। ये सिर्फ सुविधाएं मात्र नहीं है, बल्कि इससे पारिवारिक भावना को बल मिलेगा, क्योंकि बरसों से जिन भी छात्रों-प्राध्यापकों ने शोध कार्य किए, वे संयुक्त परिवार की तरह एक प्लेटफार्म पर उपलब्ध रहेंगे। पारिवारिक भावना होने से जिस प्रकार परिवार की उत्तरोतर प्रगति होती है, उसी तरह संस्थान की भी प्रगति होती है। इस दृष्टि से यह कार्य महत्वपूर्ण है। एलुमिनाई नेटवर्क से नए-पुराने स्टूडेंट्स को परस्पर मिलने के साथ ही पुराने-नए तौर-तरीके सीखने-समझने का अवसर भी मिलेगा। वहीं, कृषि शिक्षा संस्थाओं की मान्यता ऑनलाइन हो सकेगी, जिससे पारदर्शिता रहेगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी जोर पारदर्शिता पर ही है। हैदराबाद में डिजास्टर रिकवरी सेंटर खोलने से काफी सुविधा रहेगी। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति आने के बाद नए तरीके से सोचना और काम करना होगा। शिक्षा रोजगारोन्मुखी हो, गुणवत्ता अच्छी हो। सिर्फ भीड़ न हों बल्कि शिक्षा में उत्कृष्टता आए, इसका लाभ भी कृषि शिक्षा के क्षेत्र में मिलेगा। शिक्षा नीति की बातों को कैसे कृषि विज्ञान के अनुरूप बनाया जाएं, इसकी योजना बनाई जाएं।

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