मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:37 · नई दिल्ली संस्करण

"धैर्य और विवेक से खुलते हैं समृद्धि के द्वार: पीएम मोदी"

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
"धैर्य और विवेक से खुलते हैं समृद्धि के द्वार: पीएम मोदी"

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर संस्कृत सुभाषित साझा किया।

पीएम मोदी ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "धैर्य, विवेक और दूरदर्शिता से किए गए कार्यों से ही सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं, इसलिए हर निर्णय में पूरी समझदारी जरूरी है, क्योंकि सोच-समझकर उठाया गया कदम ही सफलता का आधार बनता है।

प्रधानमंत्री मोदी की ओर से संस्कृत श्लोक, "सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्। वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव सम्पदः॥" शेयर किया गया।

इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि किसी भी कार्य को बिना सोचे-समझे नहीं करना चाहिए, क्योंकि बिना विचार किए काम को करना बड़ी विपत्तियों का कारण होता है।

इसके विपरीत, जो व्यक्ति अच्छी तरह सोच विचार कर काम करता है, गुणों की सफलता और लक्ष्मी स्वयं ढूंढते हुए उसका चुनाव करती हैं।

इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने 15 जून को सुभाषित साझा किया था। पीएम मोदी ने लिखा था कि हर मिट्टी के ढेले में अलग सोच; हर जलाशय में ताजा पानी। हर जन्म में नई खोजें; हर मुंह में नई बोली होती है।

प्रधानमंत्री ने वीडियो शेयर कर लिखा था कि नवाचार और उद्यम के क्षेत्र में प्रत्येक व्यक्ति की सोच और सर्जनात्मक दृष्टि अलग-अलग होती है, और यही विविधता नई संभावनाओं को जन्म देती है।

जिस प्रकार हल जल स्रोत का स्वाद भिन्न होता है, उसी प्रकार हर प्रतिभा अपनी अनूठी पहचान और योग्यता रखती है। इन्हीं भिन्न-भिन्न विचारों और क्षमताओं के समन्वय से नवाचार और प्रगति संभव होती है।

इससे पहले पीएम मोदी ने 12 जून को सुभाषित शेयर किया था। तब पीएम ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा था कि भारत की नारी शक्ति राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। हमारी माताएं, बहनें और बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी अद्भुत प्रतिभा और कौशल से मां भारती का गौरव बढ़ा रही हैं।

उन्होंने संस्कृत श्लोक "नारी त्रैलोक्यजननी नारी त्रैलोक्यरूपिणी। नारी त्रिभुवनाधारा, नारी शक्तिस्वरूपिणी॥" शेयर किया था, जिसका हिंदी अर्थ है कि नारी तीनों लोकों की जननी है। नारी ही तीनों लोगों की अभिव्यक्ति है। वही पूरे संसार का आधार है और वही शक्ति का वास्तविक स्वरूप है।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें