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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:18 · नई दिल्ली संस्करण

सुखद : धौलपुर की चंबल नदी तथा ताल-तलैयों में दिखीं 200 से आधिक पक्षी की प्रजातियाँ

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
सुखद : धौलपुर की चंबल नदी तथा ताल-तलैयों में दिखीं 200 से आधिक पक्षी की प्रजातियाँ

धौलपुर। पूर्वी राजस्थान के धौलपुर जिले की चंबल नदी इन दिनों प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी से गुलजार है। चंबल नदी के साथ ही जिले के अन्य बांध तथा ताल-तलैयों में भी देश और विदेशी पक्षियों की मौजूदगी देखने को मिल रही है। करीब दस पूर्व किए गए सर्वे और गणना में धौलपुर जिले में दो से अधिक पक्षी की प्रजातियां देखने को मिलीं हैं। वाटर वर्ड काउंट में हुए खुलासे के बाद में अब आने वाले दिनों में धौलपुर जिले में पर्यटन को पंख लगेंगे,ऐसा माना जा रहा है।चंबल वन विहार रेंज के क्षेत्रीय वन अधिकारी दीपक कुमार मीना ने बताया कि धौलपुर जिले में 10 से 11 जनवरी तक वैटलेंड इंटरनेशनल साउथ एशिया और राजस्थान वन विभाग द्वारा ई-वर्ड और वर्ड काउंट इंडिया के सहयोग से विभिन्न वैटलेंड एवं वन क्षेत्रो में एशियन वाटर वर्ड काउंट- 2026 आयोजित किया गया। जिसके तहत धौलपुर जिले में चंबल नदी सहित दमोह, निभी, सोने का गुर्जा पार्वती डैम, हुसैन सागर, रामसागर, वन विहार, केसरबाग, तगावली, पचगांव, चंबल शेरगढ़, भीलगावा कोठी और हनुमान झील एवं अन्य स्थानों पर सर्वे किया गया। चंबल क्षेत्र पहले से ही इंडियन स्किमर और ब्लैक-बेलिड टर्न जैसे दुर्लभ पक्षियों की उपस्थिति के लिए प्रसिद्ध है। वहीं अन्य सर्वेक्षित क्षेत्रों में जलपक्षियों और स्थलीय पक्षियों दोनों की अनेक प्रजातियाँ दर्ज की गईं। दमोह क्षेत्र में गिद्धों की कम से कम पाँच प्रजातियाँ पाई गई, जिनमें प्रवासी हिमालयन ग्रिफ़न और यूरेशियन ग्रिफ़न गिद्ध भी शामिल हैं। इस क्षेत्र में व्हीटियर और ग्रेट ग्रे श्राइक जैसे छोटे प्रवासी पक्षियों की भी बड़ी विविधता दर्ज की गई। तगावली एसटीपी क्षेत्र, नींभी, रामसागर और पार्वती डैम में प्रवासी बतखों की कई प्रजातियाँ पाई गईं। जिनमें पाएड एवोसट ग्रे लेगगूस्ज गूज, रफ्फ, ब्लैक टेल्ड गोडविट, कॉटन पिग्मी गूज, रेड-क्रेस्टेड और कॉमन पोचार्ड, तथा फेरुजिनस डक शामिल हैं।मछली खाने वाले बड़े आकार के स्थानीय और प्रवासी पक्षी. जैसे पेलिकन की दो प्रजातियाँ भी इस सर्वेक्षण का प्रमुख आकर्षण बने। जलपक्षियों में बार-हेडेड गूज़ भी बड़ी संख्या में पाए गए। ये पक्षी शीत ऋतु के दौरान मंगोलिया से हिमालय के ऊपर से उड़ान भरते हुए भारत आते हैं। इनमें कॉमन रोज़फिंच, ग्रे बुशचैट और रेड-व्हिस्कर्ड बुलबुल को धौलपुर क्षेत्र में पहली बार चिन्हित किया गया। इसके अतिरिक्त, स्ट्राइएटेड ग्रासबर्ड को इस सप्ताह न केवल धौलपुर में बल्कि पूरे राजस्थान राज्य में पहली बार प्रमाण सहित दर्ज किया गया। चंबल को आमतौर पर ब्लैक बेल्लिद टर्न और स्किमर जैसे पक्षियों के लिए ह जाना जाता है। वहीं यह क्षेत्र बोनेलीज़ ईगल, वेस्टर्न मार्श हैरियर और शॉर्ट-टोड स्नेक ईगल जैसे शिकारी पक्षियों के लिए भी एक समृद्ध और विविध पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करता है। बोनेलीज़ ईगल चंबल के आसपास की बिहड़ (रैवाइन्स) में घोंसला बनाता है। धौलपुर के विविध भौगोलिक परिदृश्य में केवल आर्द्रभूमि ही नहीं, बल्कि झाड़ीदार क्षेत्र, शुष्क भूमि. घने वन, बिहड़ (रैवाइन्स) और घाटियाँ (कैन्यन) भी शामिल हैं। ऐसे में शीतकालीन प्रवासी पक्षियों के लिए ये सभी क्षेत्र मिलकर इसे पक्षियों के लिए एक स्वर्ग बनाते हैं।मीना ने बताया कि इस सर्वेक्षण का एक मुख्य धौलपुर में नव गठित धोलपुर-करौली टाइगर रिज़र्व की जैव विविधता को विश्व के समक्ष प्रसरिस्त करना एवं पर्यटन को बढावा देते हुए ही रोज़गार के नए अवसर उत्पन्न करना है। इस कारण सर्वेक्षण में देश भर से आये 15 बर्ड एक्सपर्ट वालंटियर को सम्मिलित किया गया। यही नहीं इस सर्वेक्षण में पक्षियों की विविधता और उनके आवास का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार करने से आवास पर मंडरा रहे खतरों और भविष्य की संरक्षण चुनौतियों की भी पहचान हुई है। ऐसा माना जा रहा है कि भरतपुर के घना के बाद में आने वाले दिनों में धौलपुर का चंबल क्षेत्र भी पक्षी प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग बनेगा।

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