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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:05 · नई दिल्ली संस्करण

35 साल बाद हत्या केस में बड़ी कार्रवाई, फरार आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
35 साल बाद हत्या केस में बड़ी कार्रवाई, फरार आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ा

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल (आईएससी) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए 35 वर्ष पुराने हत्या के मामले को सुलझा लिया है। वर्ष 1991 में हुई इस नृशंस घटना के मुख्य आरोपी, छवि लाल वर्मा, को पंजाब के लुधियाना से गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी पिछले 35 वर्षों से फरार चल रहा था और उसे वर्ष 1996 में ही 'घोषित अपराधी' घोषित किया जा चुका था।

2 अगस्त 1991। 2 अगस्त 1991 को दिल्ली के पश्चिम विनोद नगर में स्थित एक मकान से पीसीआर कॉल मिली थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि घर की मालकिन (लगभग 55 वर्षीय महिला) के गले पर चाकू से कई गहरे घाव थे और वह बेहोश पड़ी हुई थी। उसके बेटे (उम्र लगभग 18-20 वर्ष) के चेहरे पर भी चाकू के घाव थे। दोनों को तुरंत लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल (एलएनजेपी) ले जाया गया, जहां महिला ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जबकि बेटा बच गया।

जांच में सामने आया कि आरोपी छवि लाल वर्मा उसी मकान में किराएदार था। उसने लूट के इरादे से रात में मकान मालकिन के कमरे में घुसकर चॉपर (धारदार हथियार) से हमला किया। जब महिला और उसका बेटा विरोध करने लगे तो आरोपी ने दोनों पर जानलेवा हमला कर दिया। हत्या के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।

क्राइम ब्रांच आईएससी की टीम, जिसमें एसआई नरेश कुमार, एसआई सुनील पंवार, एचसी सुनील कुमार, आशीष मलिक, सोनू तोमर और राजेश कुमार शामिल थे, इंस्पेक्टर मनमीत मलिक के नेतृत्व और एसीपी रमेश चंदर के मार्गदर्शन में लगातार काम कर रही थी।

टीम ने पिछले छह महीनों से तकनीकी निगरानी, फील्ड इंटेलिजेंस और पूछताछ के जरिए आरोपी का पता लगाने का प्रयास किया।

आरोपी के मूल गांव सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश) और उसके रिश्तेदारों के ठिकानों पर गहन जांच की गई। विश्वसनीय सूचना मिलने पर पता चला कि आरोपी लुधियाना (पंजाब) में छिपा हुआ है। 10 अप्रैल 2026 को रेडिंग टीम भेजी गई और स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी को सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तारी के बाद की गई पूछताछ में छवि लाल वर्मा ने कबूल किया कि उसे लगा था मकान मालकिन के पास काफी नकदी है क्योंकि उसका पति विदेश में रहता था।

लूट के इरादे से वह कमरे में घुसा। विरोध करने पर उसने चॉपर से हमला कर दिया। अपराध के बाद वह कोलकाता, मुंबई, नागपुर, गोवा और पंजाब सहित कई शहरों में जगह-जगह अपना ठिकाना बदलता रहा। 35 वर्षों तक फरार रहने के दौरान वह अपने गांव भी नहीं गया और न ही अपने बच्चों की शादियों में शामिल हुआ। वर्तमान में वह लुधियाना में एक निजी संस्थान में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम कर रहा था।

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