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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:18 · नई दिल्ली संस्करण

दिल्ली कला उत्सव का समापनः प्रस्तुतियों ने बनाया यादगार सांस्कृतिक आयोजन

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
दिल्ली कला उत्सव का समापनः प्रस्तुतियों ने बनाया यादगार सांस्कृतिक आयोजन

नई दिल्ली। संस्कार भारती दिल्ली प्रांत का दिल्ली सरकार के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय 'दिल्ली कला उत्सव' का सफल समापन रवींद्र भवन में संपन्न हुआ। दोनों दिनों तक चले इस सांस्कृतिक उत्सव ने न केवल बड़ी संख्या में कला प्रेमियों को आकर्षित किया, बल्कि अपनी उच्च स्तरीय प्रस्तुतियों के कारण इसे एक यादगार आयोजन के रूप में सराहा गया।उद्घाटन समारोह में केंद्रीय सड़क परिवहन राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, संस्कार भारती के अखिल भारतीय सह-व्यवस्था प्रमुख एवं क्षेत्रीय संगठन मंत्री विजय कुमार तथा संस्कार भारती के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य अशोक तिवारी की उपस्थिति रही। अतिथियों ने भारतीय कला और संस्कृति के संरक्षण एवं प्रसार में ऐसे आयोजनों की महत्ता पर प्रकाश डाला।उत्सव के दोनों दिनों में शास्त्रीय संगीत, नृत्य, लोक प्रस्तुतियां, नाट्य मंचन, काव्य एवं पारंपरिक कला रूपों का समृद्ध संगम देखने को मिला। सुप्रसिद्ध संतूर वादक एवं संगीतकार पंडित अभय रुस्तम सोपोरी ने अपने संतूर वादन के माध्यम से राग भारतीय की विशेष प्रस्तुति दी, जो एक नवीन राग है और दर्शकों द्वारा अत्यंत सराही गई।रंगमंचीय प्रस्तुतियों में प्रदीप कुकरेजा ने निर्देशित नाटक “बेसहारा औरत” को विशेष सराहना मिली। उत्सव के अंतर्गत आयोजित कवि सम्मेलन भी हमेशा की तरह आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर किया। उत्सव का सबसे विशेष आकर्षण ‘वृंदावन की फूलों की होली’ रही, जिसे चारकुला आर्ट्स अकादमी ने प्रस्तुत किया और जिसने दर्शकों को होली की सांस्कृतिक परंपरा से गहराई से जोड़ दिया।कार्यक्रम का संयोजन प्रख्यात नाटककार जयप्रकाश सिंह ने किया। दिल्ली कला उत्सव की विशेषता यह रही कि यह कोई व्यावसायिक या लाभ केंद्रित आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय कला परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के उद्देश्य से आयोजित सांस्कृतिक उत्सव है।संस्कार भारती, दिल्ली प्रांत के अध्यक्ष प्रभात कुमार ने इस सफल आयोजन के लिए सभी कलाकारों, अतिथियों, सहयोगियों एवं आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को समाज में सशक्त रूप से स्थापित करने का माध्यम बनते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अगले वर्ष दिल्ली प्रांत इस उत्सव के स्वरूप को और व्यापक एवं भव्य बनाने की दिशा में कार्य करेगा।दोनों दिनों में लोक कला, पारंपरिक शिल्पकारों की सहभागिता, कठपुतली, हस्तशिल्प प्रदर्शन तथा दिल्ली-6 के पारंपरिक व्यंजन भी थे। बड़ी संख्या में परिवारों, विद्यार्थियों और कला प्रेमियों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष ऊंचाई प्रदान की।उल्लेखनीय है कि दिल्ली कला उत्सव के आयोजन में दिल्ली सरकार के सहयोग के साथ-साथ मैथिली-भोजपुरी अकादमी, ललित कला अकादमी तथा विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं की सहभागिता भी रही, जिससे यह आयोजन राजधानी के कला जगत का एक समन्वित सांस्कृतिक मंच बनकर सामने आया। होली पर्व के आगमन से पूर्व आयोजित इस उत्सव ने भारतीय लोकजीवन और रंगों की परंपरा को अनुभव करने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम में कला एवं संस्कृति जगत की अनेक हस्तियों की उपस्थिति रही।

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