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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:07 · नई दिल्ली संस्करण

न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर दिल्ली हाईकोर्ट में 7 जुलाई को होगी सुनवाई

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर दिल्ली हाईकोर्ट में 7 जुलाई को होगी सुनवाई

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को जजों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि जजों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हुई बैठक की पूरी कार्यवाही यानी मिनट्स ऑफ मीटिंग हलफनामे के साथ कोर्ट में दाखिल की जाए।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि कोर्ट के पहले के आदेश के बाद इस मुद्दे पर बैठक हो चुकी है, लेकिन उसकी रिपोर्ट अब तक रिकॉर्ड पर नहीं लाई गई है।

हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि क्या सभी न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षा देना संभव नहीं है। इस पर पुलिस की ओर से कहा गया कि सुरक्षा व्यवस्था खतरे के आकलन यानी थ्रेट परसेप्शन के आधार पर तय की जाती है।

पुलिस ने अदालत को बताया कि फिलहाल 12 जज ऐसे हैं जिन्हें सुरक्षा दी जा रही है, क्योंकि उनके खिलाफ संभावित खतरे का आकलन किया गया है।

इस पर अदालत ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को खतरा है तो उसे सुरक्षा देना स्वाभाविक और जरूरी है, लेकिन यहां बड़ा सवाल यह है कि क्या सभी न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा की मांग वैध है और क्या उन्हें नियमित रूप से व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी यानी पीएसओ और अतिरिक्त सुरक्षा दी जानी चाहिए।

अदालत ने साफ कहा कि जब इस विषय पर बैठक हो चुकी है तो उसकी पूरी जानकारी रिकॉर्ड पर लाई जानी चाहिए ताकि मामले को ठीक तरीके से समझा जा सके।

यह पूरा मामला ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन ऑफ दिल्ली की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है।

याचिका में मांग की गई है कि दिल्ली के जजों को उनके घरों पर व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी और अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कई मामलों में जज संवेदनशील फैसले सुनाते हैं, जिसके चलते उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

अब दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को बैठक की रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई तय की है। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में अदालत इस बात पर विस्तार से विचार करेगी कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर भविष्य में क्या व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

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