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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:38 · नई दिल्ली संस्करण

दिल्ली हाईकोर्ट ने राघव चड्ढा की पर्सनैलिटी राइट्स याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
दिल्ली हाईकोर्ट ने राघव चड्ढा की पर्सनैलिटी राइट्स याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसमें उनके व्यक्तित्व अधिकारों (पर्सनैलिटी राइट्स) की रक्षा करते हुए सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ फैलाई जा रही अपमानजनक, भ्रामक और डीपफेक सामग्री को हटाने की मांग की गई है।

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि व्यक्तित्व अधिकारों के व्यावसायिक उपयोग और राजनीतिक आलोचना में स्पष्ट अंतर है। अदालत ने प्रथम दृष्टया यह भी टिप्पणी की कि राघव चड्ढा के व्यक्तित्व अधिकारों का कोई उल्लंघन दिखाई नहीं देता है।

कोर्ट ने कहा, "राजनीतिक क्षेत्र में आपके द्वारा लिए गए निर्णय आलोचना का विषय हो सकते हैं। आजकल सोशल मीडिया की पहुंच बहुत ज्यादा हो गई है।

राघव चड्ढा की याचिका में मुख्य रूप से एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो, छेड़छाड़ किए गए वीडियो, फर्जी भाषण और भ्रामक सामग्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से तुरंत हटाने की मांग की गई है। याचिका में इन सामग्रियों को उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए कहा गया है कि इससे उनकी छवि को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना। चड्ढा की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि सोशल मीडिया पर उनके मुवक्किल के खिलाफ लगातार गलत और अपमानजनक सामग्री वायरल की जा रही है, जो न केवल उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाती है बल्कि सार्वजनिक भ्रम भी पैदा करती है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने हालांकि स्पष्ट किया कि राजनीतिक आलोचना को व्यक्तित्व अधिकारों के उल्लंघन के रूप में नहीं देखा जा सकता, लेकिन साथ ही यह भी माना कि यदि कोई सामग्री पूरी तरह फर्जी, डीपफेक या मानहानिकारक है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के वर्षों में सांसदों और सार्वजनिक व्यक्तियों के खिलाफ डीपफेक और एआई टूल्स के जरिए फर्जी सामग्री बनाने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।

कई राजनेताओं ने ऐसी सामग्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू की है।

अदालत अब इस याचिका पर अपना अंतिम फैसला कुछ दिनों में सुनाएगी, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और पर्सनैलिटी राइट्स के दायरे को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।

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