दिल्ली दंगा केस: नेताओं के हेट स्पीच पर FIR नहीं होगी, HC ने सभी याचिकाएं खारिज कीं
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के दंगों से जुड़े हेट स्पीच मामले में बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने नेताओं के भड़काऊ भाषणों पर FIR और SIT जांच की मांग वाली सभी 15 याचिकाएं खारिज कर दीं। 5 अक्टूबर को आए इस फैसले से याचिकाकर्ताओं को झटका लगा है। कोर्ट ने कहा अलग FIR का औचित्य नहीं।

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े बहुचर्चित हेट स्पीच मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने नेताओं की कथित भड़काऊ भाषणों को लेकर FIR दर्ज करने और SIT से जांच कराने की मांग वाली सभी 15 याचिकाओं को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद इन मामलों में FIR और विशेष जांच दल से जांच की उम्मीद कर रहे याचिकाकर्ताओं को बड़ा झटका लगा है। यह फैसला सोमवार 5 अक्टूबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि इन याचिकाओं में FIR दर्ज करने और SIT गठन करने का कोई आधार नहीं बनता। याचिकाओं में मांग की गई थी कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से पहले कुछ राजनीतिक नेताओं द्वारा दिए गए कथित नफरती भाषणों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
गौरतलब है कि फरवरी 2020 में दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध-प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे, जिसमें 50 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। दंगों के बाद कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और पीड़ितों ने आरोप लगाया था कि दंगों से कुछ दिन पहले कुछ बड़े नेताओं ने भड़काऊ भाषण दिए थे, जिसके कारण हिंसा भड़की। इसी को आधार बनाकर दिल्ली हाईकोर्ट में अलग-अलग 15 याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि उन भाषणों के आधार पर FIR दर्ज की जाए और मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र SIT का गठन किया जाए, ताकि सच सामने आ सके। इन याचिकाओं में कई वरिष्ठ नेताओं के नाम भी शामिल थे। इस मामले में पिछले कई सालों से सुनवाई चल रही थी। दिल्ली पुलिस की ओर से लगातार दलील दी जा रही थी कि दंगों से जुड़े सभी मामलों की जांच पहले से ही हो रही है और अलग से FIR की जरूरत नहीं है।
पुलिस का तर्क था कि हेट स्पीच के आरोपों को भी उसी जांच का हिस्सा माना गया है। वहीं याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जानबूझकर बड़े नेताओं को बचाने की कोशिश हो रही है। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद अंततः याचिकाओं को खारिज करने का फैसला लिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस स्तर पर अलग से FIR दर्ज करने और SIT जांच का आदेश देने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट के इस फैसले को राजनीतिक और कानूनी दोनों लिहाज से अहम माना जा रहा है। एक तरफ जहां सरकार और पुलिस के लिए यह राहत भरी खबर है, वहीं याचिकाकर्ताओं के लिए निराशा है। अब याचिकाकर्ताओं के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प बचा है। फिलहाल इस फैसले के बाद 2020 दिल्ली दंगा हेट स्पीच केस में FIR और SIT जांच की मांग फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है।





