मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:18 · नई दिल्ली संस्करण

धर्मांतरण विवाद के बीच 36 घंटे तक पड़ा रहा शव

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
धर्मांतरण विवाद के बीच 36 घंटे तक पड़ा रहा शव

पश्चिम मेदिनीपुर (पश्चिम बंगाल)। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के डेबरा के जालिमांदा क्षेत्र के गोपालपुर गांव में धर्मांतरण पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। गांव के निवासी सुबल बेसरा (42) की शनिवार सुबह हार्ट अटैक से मौत हो गई, लेकिन यह तय न हो पाने के कारण कि उनका अंतिम संस्कार किस धर्म के अनुसार होगा, शव 36 घंटे तक पड़ा रहा।चार साल पहले सुबल और उनका परिवार हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म में दीक्षित हुए थे। मृत्यु के बाद सुबल की मां गांव के क्रिश्चियन समुदाय के प्रमुख रबी सोरेन के घर सहयोग मांगने गईं पर आरोप है कि रबी और उनका परिवार किसी भी तरह की मदद से पीछे हट गया।इसके बाद सुबल की मां आदिवासी समाज के मुखिया रवींद्रनाथ किस्कू के घर पहुंचीं। आदिवासी समाज ने चर्चा कर निर्णय लिया कि रविवार सुबह एक बार फिर ईसाई समुदाय से अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया जाएगा। किंतु ईसाई परिवारों ने यह कहते हुए मना कर दिया कि सुबल का परिवार अब धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय नहीं था, इसलिए वे अंतिम संस्कार में सहयोग नहीं करेंगे।इससे गांव में विवाद बढ़ गया। सूचना मिलने पर पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और जिला परिषद की कर्माध्यक्ष शांति टुडू मौके पर पहुंचे। लंबी चर्चा और समझाने बुझाने के बाद अंततः क्रिश्चियन समुदाय सुबल का अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार हो गया। रविवार देर शाम को सुबल का अंतिम संस्कार क्रिश्चियन रीति से किया गया।आदिवासी समाज के युवा नेता सुनिल बेसरा ने कहा, “गांव में कुछ परिवारों को बहला–फुसलाकर धर्मांतरण कराया गया है। सुबल का परिवार भी उनमें था। मृत्यु के बाद उनके समुदाय ने मदद नहीं की, इसलिए हमने बातचीत कर समाधान निकाला। चूंकि उन्होंने धर्म बदला था, इसलिए उसी धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार उचित था।”जिला परिषद की कर्माध्यक्ष शांति टुडू ने कहा, “धर्मांतरण को लेकर इन दूरदराज इलाकों में अक्सर मतभेद पैदा होते हैं। यहां भी वही स्थिति बनी। प्रशासन और स्थानीय समाज के सहयोग से अंततः सबकुछ शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।”

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें