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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:20 · नई दिल्ली संस्करण

जादवपुर यूनिवर्सिटी में देशविरोधी नारों पर सख्ती, दिलीप घोष ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
जादवपुर यूनिवर्सिटी में देशविरोधी नारों पर सख्ती, दिलीप घोष ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

न्यूटाउन। जादवपुर यूनिवर्सिटी में कथित तौर पर देश-विरोधी नारे लिखे जाने को लेकर विवाद के बीच पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपने विचार व्यक्त करने और नारे लिखने का अधिकार है, लेकिन देश के खिलाफ नारे लगाने या लिखने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।

पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि बंगाल में दीवारों पर राजनीतिक विचार और नारे लिखने की पुरानी परंपरा रही है। लोकतांत्रिक तरीके से काम करने वाले संगठन अपने विचार इस माध्यम से भी व्यक्त करते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी यूनिवर्सिटी या किसी अन्य स्थान पर देश के खिलाफ आवाज उठाने या नारे लिखने को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जादवपुर यूनिवर्सिटी में लिखे गए कथित देशविरोधी नारों की पहचान कर उन्हें मिटा दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में कोई दोबारा इस तरह के नारे लिखने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपने विचार रखने और नारे लगाने की इजाजत होनी चाहिए, बंगाल में यह परंपरा रही है।

जो देश-विरोधी नारा लिखा गया था, उसे मिटा दिया गया है। किसी को भी दोबारा ऐसे नारे लिखने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, वरना कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस दौरान दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को लेकर भी टिप्पणी की। टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन को पुलिस द्वारा बुलाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कुछ टीएमसी नेताओं को पहले यह लगता था कि वे कानून या अदालतों की परवाह किए बिना कुछ भी कर सकते हैं।

उन्हें ऐसी स्थिति का सामना करना ही पड़ेगा और कानून अपना काम करेगा।

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए घोष ने कहा कि किसी को भी बाहर जाने से नहीं रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि विधायक और सांसद विधानसभा की बैठकों में शामिल हो रहे हैं और सामान्य रूप से अपने काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, लोकतंत्र में लोगों की नाराजगी जाहिर करना भी अधिकार है, इसलिए किसी को डरने की जरूरत नहीं है।

दिलीप घोष ने अभिषेक बनर्जी पर राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि जो नेता जनता के बीच नहीं जाते और जिनका लोगों से सीधा संपर्क नहीं है, उन्हें स्वाभाविक रूप से जनता के बीच जाने को लेकर डर महसूस हो सकता है।

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