मालेगांव केस पर कोर्ट के फैसले को बताया न्याय की जीत, वीरेंद्र सचदेवा बोले – ‘हिंदू आतंकवाद की थ्योरी’ हुई तार-तार, कांग्रेस को देश से मांगनी चाहिए माफी

मालेगांव केस पर कोर्ट के फैसले को बताया न्याय की जीत, वीरेंद्र सचदेवा बोले – ‘हिंदू आतंकवाद की थ्योरी’ हुई तार-तार, कांग्रेस को देश से मांगनी चाहिए माफी
नई दिल्ली, 31 जुलाई 2025 — दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने मालेगांव ब्लास्ट केस में एन.आई.ए. की विशेष अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह न केवल न्याय की जीत है, बल्कि तथाकथित "हिंदू आतंकवाद" की झूठी थ्योरी की भी करारी हार है। उन्होंने इस ऐतिहासिक फैसले के बाद स्पष्ट कहा कि कांग्रेस पार्टी द्वारा वर्षों तक राष्ट्रवादी सोच रखने वाले निर्दोष लोगों को फंसाने का जो षड्यंत्र रचा गया था, वह आज न्यायालय में ध्वस्त हो गया है।
सचदेवा ने कहा कि मालेगांव केस में झूठे मुकदमों के जरिए हिन्दू समाज को बदनाम करने की कोशिश की गई थी। तथाकथित भगवा आतंकवाद की अवधारणा केवल एक राजनीतिक हथकंडा था, जिसे एक खास वोट बैंक को साधने के लिए कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों ने गढ़ा था। लेकिन आज कोर्ट के फैसले ने इन साजिशों को उजागर कर दिया है।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने यह भी मांग की कि जिन लोगों ने इस झूठे केस की पटकथा लिखी, निर्दोषों को प्रताड़ित किया और देश को गुमराह किया—उन पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल न्यायिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी एक निर्णायक क्षण है।
वीरेंद्र सचदेवा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनके समर्थकों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें न सिर्फ हिन्दू समाज से, बल्कि पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हिंदू आतंकवाद" जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर बहुसंख्यक समाज को कलंकित किया गया, जो आज असत्य सिद्ध हो चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वर्षों तक आतंकियों को राजनीतिक संरक्षण देने के लिए हिन्दू समाज को कटघरे में खड़ा किया। यह फैसला न केवल उन निर्दोषों के सम्मान की पुनर्स्थापना है, बल्कि उन लाखों लोगों के विश्वास की जीत है जो वर्षों से इन आरोपों को झेलते आए।
वीरेंद्र सचदेवा ने अंत में कहा कि जब अदालत ने सच्चाई सामने ला दी है, तो अब कांग्रेस इस फैसले के खिलाफ अपील की बात कर रही है, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि वे अभी भी अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। देश की जनता अब सच और झूठ के बीच का फर्क अच्छी तरह समझ चुकी है, और इस ऐतिहासिक फैसले से देश में एक सकारात्मक न्यायिक परंपरा और सामाजिक संतुलन की नई शुरुआत हुई है।





