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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:30 · नई दिल्ली संस्करण

सीएम ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में पांच नए सांस्कृतिक व विकास बोर्डों की घोषणा की

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
सीएम ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में पांच नए सांस्कृतिक व विकास बोर्डों की घोषणा की

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की है कि राज्य सरकार शीघ्र ही मुंडा, कोरा, डोम, कुंभकार और सदगोप समुदायों के लिए पांच नए 'सांस्कृतिक एवं विकास बोर्ड' स्थापित करेगी। यह जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा की।

मुख्यमंत्री ममता ने कहा कि ये समुदाय बंगाल की जीवंत संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने सभी समुदायों के लोगों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए इस पहल की सराहना की।

उन्होंने बताया कि नए बोर्ड इन समुदायों की अनूठी भाषाओं और परंपराओं की सुरक्षा करेंगे और उनके सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इन बोर्डों का उद्देश्य इन समुदायों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों में सुधार करना भी है। यह पहल उनके पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा के साथ-साथ उनके सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने के लिए बनाई गई है। यह कदम उन लोगों की भलाई के लिए है जो लंबे समय से सामाजिक व आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 से राज्य सरकार ने समाज के कमजोर वर्गों के लिए कई बोर्ड स्थापित किए हैं। इन बोर्डों ने समाज के विभिन्न समुदायों को समावेशी विकास के अवसर प्रदान किए हैं। इस नई पहल का उद्देश्य पहले से चल रहे प्रयासों को और मजबूत करना और प्रत्येक समुदाय की आवश्यकताओं का ध्यान रखना है।

उन्होंने कहा, "'मां, माटी, मानुष' के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का अर्थ है कि हम यह सुनिश्चित करें कि कोई भी समुदाय पीछे न छूटे। हमारा लक्ष्य सरल है समावेशी प्रगति और अटूट समर्थन के माध्यम से हर चेहरे पर मुस्कान लाना।"

वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पश्चिम बंगाल में सामाजिक समावेशन और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

इससे न केवल इन समुदायों की पहचान और गौरव बढ़ेगा बल्कि उनके जीवन स्तर में सुधार और रोजगार के अवसरों में वृद्धि भी सुनिश्चित होगी। इन बोर्डों के गठन से राज्य में विविधता और सामाजिक समावेशन को नई दिशा मिलेगी, जिससे पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

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