चार महीने में ही बिखरी CJP: अभिजीत दीपके पर उठे सवाल, नाराज धड़े ने नए संगठन का किया ऐलान

राजनीति से दूर रहने का दावा करने वाले अभिजीत दीपके की ‘कॉकॉरच जनता पार्टी’ (सीजेपी) में आंतरिक कलह सामने आ गई है, और यह दल अपनी स्थापना के मात्र चार महीने बाद ही बिखरता दिख रहा है। मई में बनी यह पार्टी सितंबर आते-आते टूट के कगार पर पहुंच गई है। पार्टी के एक प्रमुख सदस्य मनीष ब्रह्मभट्ट ने न केवल दीपके का साथ छोड़ दिया है, बल्कि एक नए गुट कॉकॉरच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक’ (सीजेपी-डी) के गठन की घोषणा भी की है। इस घटनाक्रम ने दीपके और उनके साथियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ब्रह्मभट्ट ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद को सीजेपी से अलग करते हुए अभिजीत दीपके पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक आंदोलन की सफलता के बाद जमीनी कार्यकर्ताओं और छात्रों के हितों का सौदा कर दिया गया और संगठन एक खास राजनीतिक दल के करीब चला गया है। ब्रह्मभट्ट के अनुसार, आंदोलन की सफलता के बाद गठित की गई 12 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम के चयन में किसी भी जमीनी कार्यकर्ता, छात्र या सोशल मीडिया वॉलंटियर से सलाह नहीं ली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नई टीम के 8 सदस्य एक अन्य राजनीतिक दल से जुड़े हैं, जिससे यह धारणा बनी है कि पूरी टीम एक खास राजनीतिक विचारधारा के हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
ब्रह्मभट्ट ने यह भी कहा कि आंदोलन में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े युवाओं ने हिस्सा लिया था, लेकिन नई टीम में उन्हें जगह नहीं मिली, और महिला, सिख तथा मुस्लिम चेहरों को भी दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस आंदोलन की नींव मेरिट और पेपर लीक के खिलाफ पड़ी थी, उसी आंदोलन के नेतृत्व ने अब मेरिट को हाशिये पर रख दिया है। मनीष ब्रह्मभट्ट ने सीजेपी-डी को एक सच्चा लोकतांत्रिक और राष्ट्रव्यापी संगठन बनाने का वादा किया है, जिसमें हर राज्य के स्थानीय आंदोलनकारियों और वॉलंटियर्स में से पांच-पांच प्रतिनिधियों को चुना जाएगा, ताकि हर क्षेत्र की आवाज को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
दूसरी ओर, अभिजीत दीपके ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है, खासकर किसी विशेष राजनीतिक दल से सांठगागांठ के आरोपों को। उन्होंने एक बयान में कहा कि उनकी पार्टी केवल छात्रों की ‘ए टीम’ है और इसका किसी अन्य दल से कोई संबंध नहीं है। दीपके ने कहा, “कुछ लोग हमें एक विशेष दल की बी टीम बताते हैं, जबकि कुछ अन्य हमें किसी और दल की बी टीम कहते हैं। मुझे लगता है कि इन नेताओं को एक साथ बैठकर तय कर लेना चाहिए। हमारी तरफ से बात साफ है।





