नमो भारत के यात्रियों को मिलेगी आरआरटीएस स्टेशनों से गाजियाबाद सिटी ट्रांसपोर्ट की बसें
गाजियाबाद,। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने
नमो भारत के यात्रियों की लास्ट माइल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए
गाजियाबाद सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज के साथ मिलकर गाजियाबाद के सभी
आरआरटीएस स्टेशनों पर इलेक्ट्रिक बस सेवा उपलब्ध कराई है। इसके लिए
आरआरटीएस स्टेशनों के प्रवेश-निकास द्वारों के पास इन इलैक्ट्रिक बसों के
लिए बस स्टॉप निर्धारित किए गए हैं।
एनसीआरटीसी के प्रवक्ता पुनीत
वत्स ने बुधवार को मीडियाकर्मियों को बताया कि आरआरटीएस स्टेशनों के पास
निर्धारित स्टॉप पर ये बस सेवाएं उपलब्ध होंगी, जिसकी मदद से यात्री बसों
और नमो भारत ट्रेनों के बीच आसानी से आवागमन कर सकेंगे। अभी ये सुविधा
गाज़ियाबाद के 7 अलग-अलग मार्गों के लिए उपलब्ध होंगी, जिसके लिए इन रूट्स
पर लगभग 50 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें संचालित की जा रही हैं।
इस
सुविधा का लाभ उठाने के लिए यात्री ‘आरआरटीएस कनेक्ट’ मोबाइल ऐप और
आधिकारिक आरआरटीएस वेबसाइट (rrts.co.in) के जरिए इन इलेक्ट्रिक बसों के
रूट्स और टाइम टेबल की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। अभी वर्तमान मे
साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर और दुहाई स्टेशनों को इन इलेक्ट्रिक बस के
रूटों के साथ एकीकृत किया गया है। इसके साथ ही मुरादनगर, मोदी नगर साउथ और
मोदी नगर नॉर्थ स्टेशनों को भी इन सिटी बसों से जोड़ने के लिए बातचीत
प्रगति पर है। इन बसों के उपयोग से मंडोला, लोनी, दादरी और मसूरी आदि
क्षेत्रों के निवासी अपने निकटतम आरआरटीएस स्टेशन तक पहुंचकर दिल्ली और
मेरठ जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों तक अधिक सुविधाजनक तरीके से पहुंच सकते
हैं।
एनसीआरटीसी ने यात्रियों की लास्ट माइल कनेक्टिविटी सुनिश्चित
करने की दिशा में अपने निरंतर प्रयासों के अनुरूप साहिबाबाद और गाजियाबाद
आरआरटीएस स्टेशनों पर ऑटो-रिक्शा, 2-व्हीलर बाइक टैक्सी के साथ-साथ
4-व्हीलर कैब आदि सेवाएं प्रदान करने के लिए रैपिडो के साथ करार किया है।
एनसीआरटीसी
लास्ट माइल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए आरआरटीएस स्टेशनों के पार्किंग
क्षेत्रों में फास्ट ईवी चार्जर भी लगा रहा है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों और
नमो भारत ट्रेनों दोनों का उपयोग बढ़ेगा, साथ ही सार्वजनिक परिवहन साधनों
का एक सतत और पर्यावरण के अनुकूल केंद्र भी बनेगा। साहिबाबाद, गाजियाबाद और
गुलधर स्टेशनों के आसपास 17 बस मार्गों की पहचान भी की गई है। इसका संचालन
राज्य प्राधिकरण या निजी बस ऑपरेटरों द्वारा किया जा सकता है।





