मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 5:55 · नई दिल्ली संस्करण

एलएसी पर चीन की सीनाजोरी, बड़ी संख्‍या में चीनी सैनिकों का जमावड़ा, भारत ने कही यह बात

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन

चीन की हठधर्मिता से भारत व चीन के बीच रिश्तों में नए सिरे से तनाव फैलने लगा है। पिछले वर्ष एलएसी पर फैले तनाव को दूर करने के लिए जो सहमति बनी थी अब वह उसे मानने से इनकार कर रहा है।

नई दिल्ली : चीन की हठधर्मिता से भारत व चीन के बीच रिश्तों में नए सिरे से तनाव फैलने लगा है। पिछले वर्ष विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग ई के बीच बैठक में पूर्वी लद्दाख स्थित वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर फैले तनाव को दूर करने के लिए जो सहमति बनी थी अब वह उसे मानने से इनकार कर रहा है। यही नहीं चीन सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिक तैनात नहीं करने के लिखित वादे का भी पालन नहीं कर रहा।

नए सिरे से की सैनिकों की तैनाती

एलएसी के कई क्षेत्रों में चीन ने नए सिरे से सैनिकों की तैनाती भी कर दी है और उल्टे मौजूदा तनाव के लिए भारत पर ही दोषारोपण करने लगा है। ऐसे में विवाद निपटाने के लिए जल्द ही दोनो देशों के विदेश मंत्रालयों के अगुआई में होने वाली बैठक को लेकर कोई उम्मीद नजर नहीं आती है। भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने भी चीन के रवैये को लेकर निराशा जताई है और चीन को याद दिलाया है कि वह लिखित वादे पर अमल करे।

मौजूदा स्थिति चुनौतीपूर्ण

एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि चीन की तरफ से लद्दाख स्थित एलएसी पर बड़े पैमाने पर चीनी सैनिकों की तैनाती हुई है। जबकि दोनों देशों के बीच यह समझौता हुआ है कि वे सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती नहीं करेंगे। जयशंकर ने मौजूदा स्थिति को चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा है कि सवाल यह है कि दोनों देश आपसी सामंजस्य व परस्पर सहयोग के आधार पर रिश्ते बना सकते हैं या नहीं।

भारत से बताया खतरा

जयशंकर की इस टिप्पणी के बारे में जब चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान से पूछा गया तो उनका जबाव था कि भारत को चीन के साथ द्विपक्षीय रिश्ते को सीमा विवाद से नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने चीन की तरफ से पश्चिमी सीमा पर तैनात भारी भरकम तैनाती को एक सामान्य रक्षात्मक व्यवस्था करार देते हुए कहा कि यह तैनाती संबंधित देश की तरफ से चीनी जमीन पर अतिक्रमण के संभावी खतरे को देखते हुए की गई है।

सैनिकों की तैनाती को समस्या की मूल जड़

उन्होंने भारतीय सैनिकों की तैनाती को समस्या की मूल जड़ बताया। जबकि तथ्य यही है कि मई, 2020 में चीनी सैनिकों की तरफ से एलएसी पर दशकों से चली आ रही व्यवस्था का अतिक्रमण करने के बाद ही भारत को रक्षात्मक कदम उठाने पड़े हैं।

वार्ता का नहीं निकला कोई नतीजा

दोनों देशों के बीच पिछले दो दौर की सैन्य वार्ता और एक दौर की विदेश मंत्रालय के स्तर पर हुई वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला है। नवंबर-दिसंबर, 2020 में एलएसी के कुछ स्थलों से चीनी सैनिकों की वापसी हुई थी लेकिन उसके बाद कोई खास प्रगति नहीं हुई है।

सैनिकों को पीछे करने को तैयार नहीं

चीन हाट स्प्रिंग, गोगरा व देपसांग इलाकों में अपने सैनिकों को पीछे करने को तैयार नहीं है। भारत आधिकारिक तौर पर यह कहता रहा है कि जब तक एलएसी से पूरी तरह से चीनी सैनिकों की वापसी नहीं हो जाती और हालात मई, 2020 से पहले वाले नहीं हो जाते तब तक तनाव नहीं घट सकता।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें