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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · शाम 5:53 · नई दिल्ली संस्करण

हरकतों से बाज नहीं आ रहा चीन, लद्दाख के पास बना रहा एयरबेस

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन

भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपने लड़ाकू विमान संचालन में सीमाओं को दूर करने की कोशिश करते हुए चीन पूर्वी लद्दाख क्षेत्र के करीब झिंजियांग प्रांत के शाक्चे शहर में लड़ाकू विमान संचालन के लिए एक एयरबेस विकसित कर रहा है।

नई दिल्ली : चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। एक तरह वो लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर टकराव वाले सभी बिंदुओं से सैनिकों की वापसी को लेकर भारत के साथ बातचीत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पूर्वी लद्दाख से सटे शिंजियांग प्रांत के शाकचे शहर में लड़ाकू विमानों के लिए एयरबेस भी विकसित कर रहा है।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि चीन यह नया एयरबेस पहले से काशगर और होगान में मौजूद एयरबेस के बीच में विकसित कर रहा है। अभी तक इन दोनों एयरबेस से ही चीन भारतीय सीमा के पास अपनी हरकतों को अंजाम देता रहा है। इस नए एयरबेस के बन जाने के बाद इस क्षेत्र में उसके ल़़डाकू विमानों की मौजदूगी और बढ़ जाएगी। पहले भारतीय सीमा से चीन के सबसे नजदीकी एयरबेस की दूरी करीब 400 किलोमीटर थी। सूत्रों ने बताया कि शाकचे शहर में पहले से ही एक एयरबेस है और उसे ही और विकसित किया जा रहा है। इस एयरबेस पर बहुत तेजी से काम चल रहा है, इसलिए जल्द ही यहां से लड़ाकू विमानों का संचालन भी शुरू हो सकता है।

भारतीय सेना चीन पर रख रही है कड़ी नजर

भारतीय एजेंसियां ​​चीन के साथ बाराहोती में उत्तराखंड सीमा के पास एक हवाई क्षेत्र पर भी कड़ी नजर रख रही हैं, जहां चीनियों ने बड़ी संख्या में मानव रहित हवाई वाहन लेकर आए हैं, जो उस क्षेत्र में लगातार उड़ रहे हैं। हाल ही में चीनी वायुसेना ने भारतीय क्षेत्रों के पास गर्मियों में एक अभ्यास किया और उनके द्वारा मुख्य रूप से होगन, काशगर और गार गुनसा हवाई क्षेत्रों से उड़ानें भरी गईं। भारतीय पक्ष ने इस अभ्यास को करीब से देखा और उस अवधि के दौरान भारतीय पक्ष तैयारी के शिखर पर था।

भारत ने तैनात किए हैं कई लड़ाकू विमान

भारत के साथ एलएसी के इस हिस्से में चीनी वायुसेना पारंपरिक रूप से कमजोर रही है, जिसमें एलएसी के साथ अपेक्षाकृत कम दूरी के हवाई क्षेत्रों में कई हवाई क्षेत्र हैं। चीनी पक्ष ने रूस से आयातित अपने एस 400 वायु रक्षा प्रणालियों की तैनाती के साथ क्षेत्र में अपनी वायु रक्षा को और मजबूत किया है, जबकि भारत ने जरूरी तौर पर चीनी लड़ाकू विमान बेड़े पर नजर रखने के लिए बड़ी संख्या में सिस्टम तैनात किए हैं।

भारतीय पक्ष ने लेह और अन्य अग्रिम हवाई अड्डों पर कई लड़ाकू विमान भी तैनात किए हैं जो लद्दाख में अपने ठिकानों से चीन और पाकिस्तान दोनों का एक साथ मुकाबला कर सकते हैं। अंबाला और हाशिमारा एयरबेस पर राफेल लड़ाकू विमानों की तैनाती और उनके संचालन ने भी चीन के खिलाफ भारत की तैयारी को बढ़ावा दिया है।

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