इटली के नौसैनिकों के हाथों मारे गए 2 मछुआरों के परिजनों को मुआवजा दे केंद्र
नई
दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो 2012 में केरल
के 2 मछुआरों को दस्यु समझकर मार देने वाले इटली के नौसैनिकों के खिलाफ केस
पीड़ितों के परिवार के सदस्यों की बात सुनने के बाद ही बंद करेगा। चीफ
जस्टिस एसए बोब्डे की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया
कि वो पीड़ित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देना सुनिश्चित करे।
सुनवाई
के दौरान केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र
सरकार ने हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के आदेश को स्वीकार करने का
फैसला किया है। इस पर केरल सरकार की ओर से वकील आदित्य वर्मा ने कहा कि
अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के आदेश और सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश में
विरोधाभास है। उन्होंने कहा कि जब तक घरेलू कानून में बदलाव नहीं किया
जाएगा तब तक अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के फैसले को लागू नहीं किया जा सकता
है।
कोर्ट
ने केंद्र सरकार से कहा कि वो केस को बंद करने के लिए ट्रायल कोर्ट जाने
की बजाय सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आई। ट्रायल कोर्ट में पीड़ितों के परिवार
के सदस्य भी पक्षकार हैं। सुप्रीम कोर्ट में तो वे पक्षकार भी नहीं हैं।
मेहता
ने कोर्ट को भरोसा दिया कि पीड़ित मछुआरों के परिजनों को सुप्रीम कोर्ट
लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इटली की सरकार ने भरोसा दिया है कि वो दो
नौसैनिकों पर अपने देश में आपराधिक केस चलाएगा। कोर्ट ने कहा कि वो ये केस
तब तक बंद नहीं करेगा जब तक पीड़ित मछुआरों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा
नहीं मिल जाएगा। केंद्र सरकार ने पिछली 3 जुलाई को सुप्रीम
कोर्ट से कहा था कि वो लंबित मामला बंद कर दे। केंद्र ने कहा था कि
अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने कहा है कि भारत को इटली से हर्जाना वसूलने का
हक है। लेकिन नौसैनिकों पर मुकदमा इटली में चलेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने 6 मार्च 2017 को केंद्र
सरकार को हेग के अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल में चल रही कार्यवाही की प्रगति
रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करने से छूट दी थी। कोर्ट ने केंद्र को
यह निर्देश दिया था कि वो मामले के बारे में केरल सरकार को अवगत कराते
रहें। सुप्रीम
कोर्ट ने पहले इटली के दोनों मरीन्स को इटली रहने की इजाजत दे दी थी।
दोनों पर आरोप है कि वर्ष 2012 में भारतीय समुद्री सीमा में केरल के
मछुआरों को गोली मारकर हत्या कर दी, जबकि इन मरीन्स का कहना है कि उन्होंने
उन्हें समुद्री डाकू समझकर गोली चलाई थी।





